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कृषि विश्वद्यिलय के सहायक कुलसचिव देवेंद्र यादव बर्खास्त
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कृषि विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव बर्खास्त
मोदीपुरम (मेरठ)। निलंबित चल रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव को गबन के मामले में कुलपति ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। उन पर हाईकोर्ट की फीस व हवाई यात्रा व अन्य मदों में 17 लाख रुपये के गबन का आरोप था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में सभी आरोप सही पाए गए हैं।
देवेंद्र यादव ने 8 दिसंबर 2008 को कृषि विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव का पदभार ग्रहण किया था। तत्कालीन कुलपति एमपी यादव ने लीगल कार्य के लिए उनकी नियुक्ति की थी। नियुक्ति के समय से ही वह विवादों में घिर गए थे। हालांकि विरोध के बावजूद वह इस पद पर बने रहे। वर्ष 2016 में तत्कालीन वित्त नियंत्रक सतेंद्र कुमार के सामने देवेंद्र यादव को दिए गए सरकारी धन के खर्च का बिल आया तो उसमें घालमेल पाया गया। गहनता से हुई जांच में सामने आया कि सहायक कुलसचिव ने करीब 17 लाख रुपये के सरकारी धन का गबन किया है।
इसके बाद 14 दिसंबर 2016 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था। वह करीब चार माह तक जेल में रहे थे। गबन के मामले में दोषी पाए जाने और जांच रिपोर्ट सही आने पर कुलपति डॉ. आरके मित्तल ने बुधवार शाम उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। कुलपति ने बताया कि राजभवन को भी सूचित कर दिया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं।
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गबन का पैसा जमा कराया
सच संस्था अध्यक्ष संदीप पहल ने भी इस मामले में शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि गबन का पैसा जमा किया जाए, जिसके बाद देवेंद्र यादव को वह पैसा जमा करना पड़ा था। मामले में कुलपति ने एक कमेटी बनाई थी। कमेटी का चेयरमैन डॉ. अमित कुमार, सदस्य डॉ. कमल खिलाड़ी व डॉ. सतेंद्र कुमार को बनाया गया था। एक सप्ताह पहले ही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
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मोदीपुरम (मेरठ)। निलंबित चल रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव को गबन के मामले में कुलपति ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। उन पर हाईकोर्ट की फीस व हवाई यात्रा व अन्य मदों में 17 लाख रुपये के गबन का आरोप था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में सभी आरोप सही पाए गए हैं।
देवेंद्र यादव ने 8 दिसंबर 2008 को कृषि विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव का पदभार ग्रहण किया था। तत्कालीन कुलपति एमपी यादव ने लीगल कार्य के लिए उनकी नियुक्ति की थी। नियुक्ति के समय से ही वह विवादों में घिर गए थे। हालांकि विरोध के बावजूद वह इस पद पर बने रहे। वर्ष 2016 में तत्कालीन वित्त नियंत्रक सतेंद्र कुमार के सामने देवेंद्र यादव को दिए गए सरकारी धन के खर्च का बिल आया तो उसमें घालमेल पाया गया। गहनता से हुई जांच में सामने आया कि सहायक कुलसचिव ने करीब 17 लाख रुपये के सरकारी धन का गबन किया है।
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इसके बाद 14 दिसंबर 2016 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था। वह करीब चार माह तक जेल में रहे थे। गबन के मामले में दोषी पाए जाने और जांच रिपोर्ट सही आने पर कुलपति डॉ. आरके मित्तल ने बुधवार शाम उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। कुलपति ने बताया कि राजभवन को भी सूचित कर दिया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं।
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गबन का पैसा जमा कराया
सच संस्था अध्यक्ष संदीप पहल ने भी इस मामले में शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि गबन का पैसा जमा किया जाए, जिसके बाद देवेंद्र यादव को वह पैसा जमा करना पड़ा था। मामले में कुलपति ने एक कमेटी बनाई थी। कमेटी का चेयरमैन डॉ. अमित कुमार, सदस्य डॉ. कमल खिलाड़ी व डॉ. सतेंद्र कुमार को बनाया गया था। एक सप्ताह पहले ही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।