फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Saharanpur riots: Shibirpur village, in trouble with wounds of ethnic violence, read latest updates

जानिए, कैसे सहारनपुर का मंजर खून और खंजर में बदला?

Thu, 25 May 2017 12:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 25 May 2017 12:08 PM IST
विज्ञापन
Saharanpur riots: Shibirpur village, in trouble with wounds of ethnic violence, read latest updates
सहारनपुर में तनाव बरकरार

सहारनपुर में मल्हीपुर रोड पर चंदपुर गांव में चंद कदमों की दूरियां नाप लेने के बाद महसूस होता है कि यह सन्नाटा चिलचिलाती दोपहरी का नहीं, बल्कि भीतर ही भीतर धधक रही नफरत की आग की वजह से है। ऊपर से शांत और क्लांत दिख रहे चंदपुर से लेकर शब्बीरपुर और बड़गांव तक में भीतर-भीतर नफरत की चिंगारी सुलग रही है। चंदपुर गांव की सड़क पर 72 साल के साधुराम के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं।

विज्ञापन


इससे पहले उन्होंने लोगों को आपस में लड़ते-कटते नहीं देखा। अमूमन इस इलाके में खेतों में फसलें लहलहाती थी, गन्ने की मिठास होती थी। मगर, अब यहां का मंजर खून और खंजर में बदल गया है। लोग एक अज्ञात भय अक्रांत में लग रहे हैं। साधुराम कहते हैं कि हमारे जमाने में ऊंच-नीच की कोई बात नहीं थी। नई पीढ़ी को न जाने किसकी नजर लग गई है। बात-बात पर बिना बात के ही लोग झगड़े पर उतारु हैं। करीब चार किलोमीटर दूर शब्बीरपुर में हालात ज्यादा भयावह है।
विज्ञापन


गांव में रविदास मंदिर से ही दलित बस्ती शुरू होती है और वहां अफसरों के सामने लोग अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। मगर, सटीक जवाब नहीं मिलने से उनका गुस्सा दूसरे पक्ष पर भड़क रहा है। कुछ ऐसा ही हाल राजपूत टोले की ओर भी है। उधर, वहां महिलाएं दूसरी जाति के लोगों पर संगीन आरोप लगाती हैं और प्रशासन पर दबाव में कार्रवाई की बात भी करती हैं। कुल मिलाकर यहां सौहार्द का ताना बाना छिन्न भिन्न हो चुका है और जातीय हिंसा के जख्मों से पूरा क्षेत्र ही बड़ी मुश्किल में है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बसपा सुप्रीमो की सभा से लौट रहे लोगों पर हुआ था हमला

Saharanpur riots: Shibirpur village, in trouble with wounds of ethnic violence, read latest updates
सहारनपुर के शब्बीरपुर में पुलिसफोर्स तैनात

बसपा सुप्रीमो की सभा से लौट रहे अचानक हुए हमले से चंदपुर के लोग भी दुखी हैं। नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि जिन लोगों ने ऐसा किया है वे किसी जाति के नहीं पूरे समाज के दुश्मन हैं। अगर हमें उनके मंसूबों की भनक भी होती तो पहले पुलिस को खबर कर देते। गांव के बाहर हमला कर हम सबको बदनाम कर दिया है और यहां भी विश्वास को तोड़ने की कोशिश की है। शब्बीरपुर गांव में घुसते ही मकान दलित महिला कमला का है।

उनकी दीवारें टूटी हैं और घर का सामान तितर-बितर सा पड़ा है। उनका कहना है कि पांच मई को उन पर भी हमला हुआ और घर तोड़ दिया गया। अधिकारी उनकी तरफ हैं और यही कारण है कि उन्हें अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई है। राजपूत समाज की कंचन कहती हैं कि हमारे घरों के बेकसूर युवक जेल में बंद हैं। महिलाएं घरों में अकेली हैं और गाहे-बगाहे आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की जाती हैं। पुलिस वाले तैनात हैं, मगर वे हमारी सुनते ही नहीं।

दोनों ही टोलों के युवाओं के खून अब भी उबाल मार रहे हैं। मीडिया के खिलाफ भी उनका गुस्सा है और कहते हैं कि हमें किसी की जरुरत नहीं है। अपनी लड़ाई हम लड़ना जानते हैं। हालांकि बुधवार को प्रमुख सचिव गृह से शब्बीरपुर गांव का दौरा कर दोनों पक्षों के लोगों से मुलाकात की है तो उनका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ नजर आ रहा था। शब्बीरपुर में दलित और राजपूत टोले बिल्कुल सटा हुआ है। मगर, दोनों बस्तियों के बीच में भारी पुलिसफोर्स तैनात है। भले ही वहां कोई सीमा तय नहीं है, मगर इस टोले को इधर और उस टोले के लोग उधर तक ही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed