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शराब कांड: ऐसे बच सकती थी 116 लोगों की जान, जानें- आखिर कहां हुई बड़ी चूक

Tue, 12 Feb 2019 05:38 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 12 Feb 2019 05:38 PM IST
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Saharanpur poisonous liquor scandal doctors says 116 people could have survived
विलाप करते परिजन

सहारनपुर में जहरीली शराब से हुई मौतों से प्रदेशभर में हड़कंप मचा है। चिकित्सकों का मानना है कि इस तरह की शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है, जिस कारण इसे पीने वाले का नर्वस सिस्टम निष्क्रिय हो जाता है। अगर घंटों तक इलाज न मिले तो जान जाने का खतरा रहता है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हर्षवर्धन बताते हैं कि अगर ऐसे मरीजों को दो-तीन घंटे के भीतर ही फॉमेपिजोल नामक इंजेक्शन लगा दिया जाए तो जान बचाने में आसानी हो सकती है।

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उन्होंने बताया कि यह दवा मिथाइल अल्कोहल से हो रहे शरीर के नुकसान को कम कर देती है। मेडिकल इमरजेंसी के चिकित्सकों और अन्य स्टाफ का मानना है कि जिन 17 मरीजों की मौत मेडिकल इमरजेंसी में हुई है, उनमें अधिकांश की मौत का कारण उन्हें अस्पताल देर से लाना रहा है। अगर तुरंत ही उन्हें फॉमेपिजोल दवा दे जाती तो उससे काफी लाभ मिलता। इन मरीजों को सहारनपुर से रेफर कराकर यहां लाया गया था, जिस कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बाकी 18 मरीजों का यहां उपचार चल रहा है। उनमें भी पांच मरीज गंभीर हैं, लेकिन उन्हें स्वस्थ करने के लिए पूरी कोशिश जारी है।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बीएस सोढ़ी ने बताया कि मिथाइल अल्कोहल का सेवन करने वाले व्यक्ति की हालत बिगड़ती चली जाती है। यदि बीमार को समय से इलाज दिया जाए तो उसे पहले इथाइल अल्कोहल में लाना होता है। मगर यदि वह अचेत हो जाता है तो इलाज होना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिसमें जान जाने के अधिक चांस रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कच्ची शराब का सेवन ना किया जाए।

अंग्रेजी शराब में होता है इथाइल अल्कोहल
चिकित्सकों ने बताया कि अंग्रेजी शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जबकि अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा मिला देते हैं, जो जहर का काम करता है। अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की जो मात्रा डाली जाती है, वह भी अंदाजे से होती है, जो कम ज्यादा हो जाती है, जो नर्वस सिस्टम डिएक्टिवेट (निष्क्रिय) कर देती है। इससे सुनाई देना, दिल, किडनी, लीवर और आंखों पर फर्क पड़ता है।

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