जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी का इस्तीफा नामंजूर
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जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-आमला (वर्किंग कमेटी) की बैठक में गहन चर्चा के बाद राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के इस्तीफे को नामंजूर कर दिया गया। मौलाना मदनी ने 16 जनवरी को निजी कारणों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
गुरुवार को दिल्ली में जमीयत दफ्तर के मदनी हाल में आयोजित हुई मजलिस-ए-आमला की बैठक में देशभर के उलमा शामिल हुए। जिसमें पिछली बैठक की कार्रवाई के अनुमोदन के बाद संगठन के महासचिव पद से मौलाना महमूद मदनी के इस्तीफे पर विचार किया गया। मजलिस-ए-आमला ने सर्वसम्मति से उनके इस्तीफे को नामंजूर कर दिया। साथ ही कहा कि गया कि मौलाना मदनी महासचिव पद पर पहले की तरह काम करते रहेंगे।
बता दें कि मौलाना महमूद मदनी ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को बंद लिफाफे में भेजा था। जिसे उन्होंने बाद में मौलाना मदनी के पास पुनर्विचार के लिए भेज दिया था। बाद में उन्होंने इस पर फैसला करने के लिए 7 फरवरी को मजलिस-ए-आमला की बैठक बुलाई थी। मौलाना मदनी के इस्तीफा दिए जाने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही थीं। इस्तीफा नामंजूर होने पर इन चर्चाओं पर भी विराम लगा गया।
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