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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Saharanpur: Mahant Mangalnath performed penance by water in the river in severe cold for Ram Mandir

अमर उजाला विशेष: राम मंदिर निर्माण के लिए कड़ाके की ठंड में नदी में जल तपस्या का रहे महंत मंगलनाथ

Sun, 14 Jan 2024 05:13 PM IST
Dimple Sirohi विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर
विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 14 Jan 2024 05:13 PM IST
सार

22 जनवरी को राम मंदिर में की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर देशवासी विभिन्न उत्सव और आयोजनों की तैयारी में जुटे हैं। सहारनपुर में महंत कड़ी ठंड में भी जल में खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं।

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Saharanpur: Mahant Mangalnath performed penance by water in the river in severe cold for Ram Mandir
जल में खड़े होकर तपस्या कर रहे महंत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर पूरे प्रदेश में राममय माहौल बना हुआ। हर तरफ राम की जय-जयकार की गूंज सुनाई दे रही है। इन सबके बीच नाथ संप्रदाय के एक महंत ऐसे भी हैं, जो राम मंदिर निर्माण को लेकर इस ठंड में बड़ी नहर में खड़े होकर जल तपस्या करते हैं।

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यहां बात कर रहे हैं हरियाणा के रोहतक स्थित अस्थल बोहर मठ के समाधिलीन महंत फूलनाथ के शिष्य महंत मंगलनाथ की। जो सहारनपुर के सावलपुर नवादा स्थित श्रीराम जानकी डेरे में रहते हैं और फिलहाल डेरे से थोड़ी दूर थरोली गांव से गुजर रही पूर्वी यमुना बड़ी नहर में जल तपस्या करते हैं।

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इस ठंड में सहारनपुर का तापमान शिमला और नैनीताल से भी नीचे आ गया था, ऐसे सर्द मौसम में महंत मंगलनाथ सुबह और शाम पांच बजे से लेकर आठ बजे तक तीन-तीन घंटे जल तपस्या करते हैं। इस दौरान वह गुरु गोरखनाथ का नाम जपते हैं।

बकौल महंत मंगलनाथ, वह 2017 से लगातार सर्दी के मौसम में नदी में खड़े होकर जल तपस्या और गर्मियों में अग्नि तपस्या करते हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर कहना है कि यह 500 वर्षों के संघर्ष का फल मिला है।

नाथ संप्रदाय की तपोस्थली है रोहतक का अस्थल बोहर मठ 
मूलरूप से शामली के यारपुर गांव के रहने वाले महंत मंगलनाथ ने 11 साल पहले दीक्षा ले ली थी। उनके गुरु महंत फूलनाथ और दादा गुरु गोवर्धननाथ रोहतक स्थित अस्थल बोहर मठ में समाधिलीन हैं। यह मठ नाथ संप्रदाय की तपोस्थली है।

महंत मंगलनाथ का कहना है कि गुरु के आशीर्वाद से शुरुआत में तीन साल घड़े से जल तपस्या की थी, जिसमें घड़े में पानी लेकर सिर पर डालते थे। 2017 से लगातार नदी और नहर में जल तपस्या कर रहे हैं। पहली बार बेहट नहर में जल तपस्या की थी।

इसके बाद कई अलग-अलग नदी और नहरों में जाकर हर साल 40 दिन की जल तपस्या करते हैं। जल तपस्या के माध्यम से वह राम मंदिर निर्माण और देश की सीमा पर खड़े जवानों की रक्षा के लिए अर्जी लगाते हैं।

26 जनवरी को खत्म होगी जल तपस्या 
महंत मंगलनाथ का कहना है कि इस बार जल तपस्या 15 दिसंबर से शुरू की थी। उनकी जल तपस्या 25 जनवरी को खत्म हो जाएगी, लेकिन विधि-विधान के साथ इसका समापन 26 जनवरी को सावलपुर नवादा स्थित श्रीराम जानकी डेरे में भंडारा लगाकर किया जाएगा।

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