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जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव का इस्तीफा नामंजूर होने से देवबंदी उलमा खुश

Thu, 17 Jan 2019 10:55 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 17 Jan 2019 10:55 PM IST
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Saharanpur, Jamiat Ulema e Hind general secretary's resignation rejected, and Deobandi Ulama happy
देवबंद

मौलाना महमूद मदनी का इस्तीफा नामंजूर किए जाने को लेकर जहां उलमा ने खुशी का इजहार किया। तो वहीं जमीयत उलमा-ए-हिंद की स्थानीय यूनिट की बैठक में वक्ताओं ने मदनी के महासचिव पद पर बने रहने को बहुत जरूरी बताया है।

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जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव पद से मौलाना महमूद मदनी द्वारा दिए गए इस्तीफे को नामंजूर किए जाने को लेकर ऑल इंडिया दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि आज के नाजुक दौर में कौम और मिल्लत को रहनुमाओं की सख्त जरूरत है ऐसे में मौलाना महमूद मदनी का इस्तीफा दिए जाना गलत फैसला था। उन्हें इस पर गौर करना चाहिए। 
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उन्होंने कहा कि मदनी का इस्तीफा नामंजूर किया जाना खुशी की बात है। इसलिए मदनी समेत पूरी जमीयत को इस पर गंभीरता से विचार मंथन करना चाहिए। साथ ही मदनी को चाहिए कि वह अपने इस्तीफे को वापस लेकर कौम की खिदमत के अपने काम को बदस्तूर जारी रखें।

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उधर, मोहल्ला गुज्जरवाड़ा में आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद की स्थानीय यूनिट की बैठक में उपाध्यक्ष चौधरी सादिक ने कहा कि मौलाना मदनी ने जिस जिम्मेदारी के साथ कौम और मिल्लत की सेवा कर रहे हैं वो अपने आपमें मिसाल है और उनसे पूरी कौम को फायदा पहुंच रहा है। अगर मौलाना मदनी जमीयत उलमा-ए-हिंद के महसचिव पद से त्यागपत्र देते हैं तो यह जमीयत और मिल्लत के लिए बड़े नुकसान का सबब बनेगा। चौधरी सादिक ने कहा कि जमीयत अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी किसी भी कीमत पर मदनी का इस्तीफा स्वीकार न करें। अध्यक्षता हाजी मुनशाद व संचालन सादिक सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर कारी जुबैर, महमूद, मो. सरवर, सागर, मुकीम, जबरुद्दीन, मान्ना चौधरी आदि मौजूद रहे। 

मदनी को दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा का सदस्य बनाए जाने की चर्चा
मौलाना महमूद मदनी ने महासचिव पद से इस्तीफा क्या दिया कि तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। गुरुवार को मौलाना मदनी के दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य बनाए जाने की चर्चा शुरू हो गई। इतना ही नहीं अफवाहों में कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को दारुल उलूम का मोहतमिम तक बनाया जा रहा है।

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