Meerut: CCSU में सवाल पर बवाल, प्रश्नपत्र में नक्सली-आतंकी संगठनों से की RSS की तुलना, प्रोफेसर ने माफी मांगी
सीसीएसयू में परीक्षा में पूछे गए सवाल पर बवाल खड़ा हो गया है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरएसएस को धार्मिक एवं जातीय पहचान राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाकर एतराज जताया। वहीं एबीवीपी ने इसे लेकर हंगामा कर दिया।
विस्तार
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) की एमए राजनीति विज्ञान द्वितीय वर्ष की परीक्षा में पूछे गए दो सवालों में विकल्प के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जोड़ने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आपत्ति जताई है। एबीवीपी ने इसे तथ्यहीन और गलत बताते हुए हंगामा किया। बाद में विश्वविद्यालय ने प्रश्न पत्र बनाने वाली शिक्षिका (परीक्षक) प्रो. सीमा पंवार को परीक्षा संबंधी कार्यों से डिबार कर दिया है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरएसएस को धार्मिक एवं जातीय पहचान राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाकर एतराज जताया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने कैंपस में प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर विश्वविद्यालय ने समिति बनाकर जांच कराई। इसमें पता चला कि पेपर मेरठ कॉलेज में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर सीमा पंवार ने बनाया था।
इन सवालों पर उठे सवाल...।
यह भी पढ़ें: गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड: शम्मी भी दोषी करार, अदालत आज सुनाएगी सजा, 10 को हो चुकी है उम्रकैद
दो अप्रैल को हुआ था पेपर
यह पेपर दो अप्रैल को दोपहर दो से पांच बजे की पाली में मेरठ मंडल के केंद्रों पर हुआ। ’स्टेट पॉलिटिक्स इन इंडिया’ के कोड ’जी-471 न्यू’ के पेपर में 87वें प्रश्न में पूछा गया-निम्न में से किसे परमाणु समूह नहीं माना जाता है?’। जो विकल्प दिए गए उसमें ए-नक्सली समूह, बी-जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, सी-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, डी-दल खालसा, शामिल हैं।
वहीं, प्रश्न-93 में सुमेल कीजिए के विकल्प में पिछड़ों की राजनीति का उदय, दलितों की राजनीति का उदय, धार्मिक एवं जातीय पहचान राजनीति का उदय, क्षेत्रीय पहचान राजनीति का उदय का मिलान शिवसेना, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बहुजन समाज पार्टी, मंडल आयोग से करना था। इस प्रश्न में धार्मिक एवं जातीय पहचान राजनीति का उदय के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विकल्प दिया गया।
प्रोफेसर ने माफी मांगी, कहा-मेरी मंशा गलत नहीं
प्रो.सीमा पंवार ने विश्वविद्यालय से लिखित में माफी मांगते हुए कहा कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। वह पेपर में दर्ज सवाल पर क्षमा मांगती हैं। उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
पेपर से जुड़े काम नहीं कराए जाएंगे : रजिस्ट्रार
रजिस्ट्रार धीरेंद्र वर्मा के अनुसार प्रो. सीमा पंवार को विश्वविद्यालय ने बतौर परीक्षक आजीवन डिबार कर दिया गया है। भविष्य में उनसे पेपर से जुड़े काम नहीं कराए जाएंगे। परीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया। प्रोफेसर ने लिखित में गलती स्वीकार कर ली है। भविष्य में ऐसी गलती ना हो, इसका ध्यान रखने को कहा गया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का है। यह संगठन भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है। परीक्षकों को प्रश्नपत्र तैयार करते समय सभी तथ्यों को ध्यान में रखना चाहिए। विद्यार्थियों को भ्रमित न करते हुए सही प्रश्न पूछा जाना परीक्षक का दायित्व है। - डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद