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संवेदनशील माहौल में अनुशासन बेमिसाल
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 15 Feb 2016 01:30 AM IST
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आरएसएस का स्वयं सेवक संगम संवेदनशील माहौल में हुआ। करीब सौ मीटर दूरी पर ही जमियत उलेमा का जलसा था। ऐसे माहौल में जिस अनुशासन का परिचय संघ स्वयं सेवकों ने दिया वह बेमिसाल रहा। मैदान के भीतर तो व्यवस्था दुरुस्त थी ही, उससे भी बेहतर व्यवस्था स्वयं सेवकों ने बाहर संभाली। न कोई हल्ला और न ही कोई शोर और ना ही कहीं जाम लगा। ठीक दस बजे कार्यक्रम समाप्त हुआ तो 10.30 बजे तक पूरा क्षेत्र खाली हो गया।
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रविवार को संघ और जमियत के कार्यक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन सांसत में था। सुबह ठीक आठ बजे स्वयं सेवक पंक्तिबद्ध होकर मैदान में बैठ गए। इसके बाद गणगीत शुरू हुआ। ठीक 8.30 बजे सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले कार्यक्रम स्थल पहुंचे और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजली अर्पित करते हुए मंच पर विराजमान हो गये।
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इसके बाद ध्वजारोहण और शारीरिक दक्षता कार्यक्रम हुआ। ठीक 8.58 बजे दत्तात्रेय होसबले ने अपना संबोधन शुरू किया और 9.56 मिनट पर संबोधन समाप्त किया। इसके बाद प्रार्थना और ध्वजावतरण हुआ। ठीक दस बजे कार्यक्रम का समापन हो गया।
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बाहर की व्यवस्था में जुटे स्वयं सेवक
भैसाली मैदान आने के लिए रोडवेज बस स्टैंड के सामने, जली कोठी के सामने और मछेरान के रास्ते पर स्वयं सेवक तैनात थे। यहां से बड़ी गाड़ियों को आयकर कार्यालय के सामने और दोपहिया वाहनों को सीएबी कॉलेज में पार्क कराया गया। लेकिन जैसे ही कार्यक्रम समाप्त हुआ, संघ कार्यकर्ताओं ने मछेरान के पास बड़ी संख्या में अपनी ड्यूटी संभाल ली। यहां से सिर्फ बड़ी गाड़ियों को गुजारा गया।
दोपहिया वाहनों को दूसरे रास्ते से गुजारा गया। इस पूरी व्यवस्था में कहीं भी पुलिस नजर नहीं आई। पुलिस बल सिर्फ मछेरान और जली कोठी के पास तैनात था, जो जलसे में आने वालों की व्यवस्था संभाल रहा था।