रोडवेज बेटिकट यात्रा घपला: जांच चलती रही भ्रष्टाचार होता रहा, 2100 फाइलें अलमारी में हैं बंद
विभागीय सूत्रों के मुताबिक भ्रष्टाचार की 950 फाइलें नहीं, बल्कि 2100 हैं जो अलमारियों में कैद हैं। इसमें 400 फाइलें तो ऐसी हैं, जिन पर कोई कार्यवाही ही नहीं की गई है। विदाउट टिकट यात्रा कराकर विभागीय राजस्व को चूना लगाने वाले आरोपी परिचालक इस बीच न केवल पदोन्नति पाकर बाबू बन गए, बल्कि काफी संख्या में रिटायर होकर घर भी चले गए। फिलहाल आठ अधिकारियों पर चार्जशीट होने से विभाग में हड़कंप मचा है।
मेरठ रोडवेज रीजन में 1997 से लेकर 2010 तक हुए विदाउट टिकट के 950 प्रकरणों की शिकायत की गई थी। 30 से 40 विदाउट टिकट में पकड़े जाने वालों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्यवाही न करके उन्हें मलाई वाले रूट देने की बात कही गई थी। तत्कालीन रोडवेज एमडी मुकेश मेश्राम ने जांच कराई थी। जांच में पाया गया कि 1997 से 2010 तक किसी भी आरएम ने कार्रवाई नहीं की और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता रहा।
एमडी पी. गुरुप्रसाद ने जांच रिपोर्ट के आधार पर यहां तैनात रहे आठ अधिकारियों को चार्जशीट जारी कर दी है। लेकिन मामला इससे बड़ा है। अमर उजाला ने मामले की तहकीकात की तो बताया गया कि उक्त प्रकरण की जांच के दौरान भी विदाउट टिकट का भ्रष्टाचार होता रहा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस तरह के प्रकरणों की फाइलें 950 नहीं, बल्कि 2100 तक हैं। इनमें भी 400 प्रकरण तो ऐसे हैं, जिन पर अधिकारी स्तर से कोई कार्यवाही शुरू ही नहीं हुई है।
950 प्रकरणों का मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। मैं इसमें कोई कमेंट नहीं कर सकता। मेरे समय जो भी इस तरह का प्रकरण सामने आ रहा है, उस पर कार्रवाई की जा रही है। - नीरज सक्सेना, आरएम रोडवेज रीजन मेरठ