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मंत्रालय से लेकर एनजीटी पर भारी परिवहन निगम, मॉडर्न लुक में बनाने की तैयारी

Thu, 02 Mar 2017 10:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 02 Mar 2017 10:52 AM IST
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roadways came power comparing NGT
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय, मेट्रो कॉरिडोर पर राज्य सरकार और एनजीटी शहर के बीच बढ़ रहे प्रदूषण एवं यातायात को लेकर चिंतित हैं। लेकिन उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम को जैसे इससे कोई सरोकार नहीं है। भैसाली बस अड्डे को शहर से बाहर किया जाना है, पर निगम इसे यहीं पर मॉडर्न लुक में बनाने की तैयारी में है। वह भी तब जबकि यही से होकर मेट्रो ट्रेन गुजरनी है और उसकी पार्किंग के लिए इसी स्थान को चुना गया है।

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भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डे लंबे समय से बाहर करने की कवायद चल रही है। कारण है शहर में बढ़ता यातायात का बोझ। इसके अलावा मास्टर प्लान भी यही कह रहा है कि बस अड्डे बाहर हों। आए दिन जाम का कारण ये बस अड्डे हैं। चूंकि भैसाली बस अड्डा शहर के बीचों बीच है, तो यह जाम का सबसे बड़ा सबब बना है।
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मेट्रो का है यहां एलाइनमेंट
प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेट्रो ट्रेन का दिल्ली रोड पर ही कॉरिडोर है। भैसाली बस अड्डा मेट्रो ट्रेन का महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसके लिए जगह चाहिए तो राइट्स ने डीपीआर में यही प्रस्तावित किया है कि भैसाली बस अड्डे की जगह का इस्तेमाल मेट्रो के लिए किया जाएगा। कुल 1730 वर्ग मीटर जमीन की उपलब्धता यहां दिखाते हुए इतनी ही जमीन को लेने की बात डीपीआर में कही गई है। स्टेशन अंडरग्राउंड बनेगा। लेकिन पार्किंग, एंट्री, एग्जिट के लिए जगह चाहिए और यह सब बस अड्डे से मिलेगी।
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कमेटी हो चुकी गठित
इस बाबत मंडलायुक्त आलोक सिन्हा कमेटी का गठन कर चुके हैं। जमीन की उपलब्धता को एमडीए, रोडवेज आदि की टीम को संयुक्त दौरा करने को कहा है। दिल्ली रोड पर संजय वन के पास जमीन देखी गई है, तो साथ ही हापुड़ रोड पर इनर रिंग रोड के पास भी जमीन है। इसके अलावा हापुड़ रोड पर 44 वाहिनी पीएसी के पीछे सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए पांच एकड़ जमीन है, जिसे ढाई एकड़ और बढ़ाकर यहां प्रोजेक्ट पूरा किया जा सकता है। बागपत रोड पर भी संभावनाएं तलाशी गई हैं।

न्यू मेट्रो पॉलिसी में भी जताई चिंता
मंगलवार को दिल्ली विज्ञान भवन में हुई न्यू मेट्रो पॉलिसी की कार्यशाला में ऐसे ही मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यशाला में कई प्रदेशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कहा गया कि मेट्रो किसी भी शहर में तभी सार्थक होगी, जब इंटर सिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलप होगा। मेट्रो तक आने जाने का मार्ग सही होगा। कॉरिडोर तक के रास्ते साफ होंगे। कहा गया कि ऐसे शहरों में इस पर काम करना होगा, जहां मेट्रो के प्रोजेक्ट हैं। इस कार्यशाला में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू खुद मौजूद रहे थे।

एनजीटी भी चिंतित
प्रदूषण के मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी बेहद चिंतित है। एक याचिका में वन, एमडीए, रोडवेज, कमिश्नर आदि से जवाब मांगा है कि जब मास्टर प्लान में रोडवेज अड्डे बाहर करने की बात है] तो क्यों नहीं किए गए।


रोडवेज की मनमानी
परिवहन निगम इस बाबत अपनी मनमानी पर उतारू है। इस अड्डे को दोबारा से बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।  बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग को तोड़कर इस समय मैदान बना दिया गया है। नए अंदाज में बस अड्डा डेवलप करने की तैयारी है, ताकि यहां ज्यादा से ज्यादा बसें खड़ी हो सकें। इस बाबत मंडलायुक्त आलोक सिन्हा पहले भी शासन में बात कर चुके हैं। अब फिर से रोडवेज अधिकारी इस काम को करने की तैयारी में हैं।

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