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सरकारी जमीन की जांच में राजस्व विभाग का खेल

Fri, 17 Jan 2020 02:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 02:00 AM IST
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Revenue department's game in government land investigation
सरकारी जमीन की जांच में राजस्व विभाग का खेल
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मेरठ। सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में खेल शुरू हो गया है। राजस्व विभाग 17000 वर्ग मीटर जमीन को सरकारी तो मान रहा है। लेकिन कब्जा होने से इंकार करने के बजाय उस जमीन पर सड़क पटरी होने की बात कर रहा है। जो किसी के गले नहीं उतर रही है। जिलाधिकारी ने भी अब इस प्रकरण में किसी दूसरे विभाग से जांच कराने की बात कही है।
ये था मामला
बेगमपुल रोड पर स्थित एक ऑटोमोबाइल शोरूम के साथ ही एक अस्पताल सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान सरकारी जमीन पर बने होने का अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में खेवट संख्या 445 के खसरा नंबर 377 और 379 की जमीन बेगमपुल रोड पर है। खतौनी में यह जमीन ‘जेरे एहतमाम साहब बहादुर कलक्टर मेरठ’ के नाम दर्ज है। मतलब साफ है कि इस जमीन का स्वामित्व सरकार का है। इस जमीन का क्षेत्रफल लगभग 17700 वर्ग मीटर है। प्रशासनिक लापरवाही और राजस्व विभाग से इस जमीन पर कब्जा होता गया। इसी जमीन के पास खसरा नंबर 373 भी सरकारी जमीन है। जिसके एक हिस्से में एक अस्पताल बना है।
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समाचार प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने एडीएम वित्त को जांच सौंपी थी। लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। एमडीए से इस अस्पताल की पत्रावली ही गायब है। बुधवार को राजस्व विभाग की टीम ने अस्पताल के साथ ही ऑटोमोबाइल शोरूम से लेकर पीछे तक की जमीन की पैमाइश की।
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बहुत ही हास्यास्पद है जवाब
इस जमीन की पैमाइश के बाद राजस्व विभाग का दावा है कि सरकारी जमीन पर सड़क और पटरी है। जबकि जो निर्माण हैं, वह निजी जमीन पर है। राजस्व विभाग का दावा किसी भी तरह गले नहीं उतर रहा है। क्योंकि राजस्व विभाग के सिजरे (नक्शे) में सरकारी जमीन का जो खसरा नंबर दिया गया है, वह त्रिकोणीय जमीन है। ऐसे में इस पर सड़क पटरी कैसे हो सकती है। इसी तरह का जवाब अस्पताल के मामले में दिया जा रहा है, वहां भी नाला पटरी की जमीन बताई जा रही है। लेकिन मौके पर कुछ नहीं है।
होगी क्रास जांच
इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा का कहना है कि इस बार सिर्फ तहसील की रिपोर्ट पर काम नहीं होगा। बल्कि इसकी क्रास जांच किसी दूसरे विभाग से भी कराई जाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ पाई गई तो कठोर कार्रवाई तय होगी।

कोर्ट में करेंगे वाद दायर
इस प्रकरण में शिकायत करने वाले लोकेश खुराना ने आरटीआई में जांच रिपोर्ट और क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी मांगी है। लोकेश खुराना का कहना है कि इस सरकारी जमीन को लेकर वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे और गूगल मैपिंग से जमीन की पैमाइश कराने की मांग करेंगे। ताकि पूरा सच सामने आ सके।
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