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जैविक खेती के जरिये लिखी नई इबारत, दूसरे किसानों को भी किया प्रेरित 

Mon, 14 Jan 2019 02:27 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 14 Jan 2019 02:27 PM IST
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Retired army person is inspiring farmer by organic farming in meerut
मेरठ न्यूज

यूपी के मेरठ में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद गांव भामौरी निवासी सुनील कुमार अब जैविक खेती के जरिये नई इबारत लिखने में लगे हैं। न केवल अपनी बीस बीघा जमीन में जैविक खेती की जा रही है, बल्कि गांव के दूसरे किसानों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

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जैविक गन्ने से बना गुड़ अब क्षेत्र में उनकी नई पहचान बन गया है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मेरठ में लगे कृषि मेले में सुनील कुमार का स्टॉल सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र रहा था। इस स्टॉल पर किसानों से लेकर अधिकारियों तक ने जैविक गुड़ का न केवल स्वाद चखा था बल्कि अपने लिए ऑर्डर भी दिया था।
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सुनील कुमार का कहना है कि अगर लोगों को स्वस्थ रहने के साथ पर्यावरण बचाना है तो रसायन युक्त खेती को टाटा करना होगा। सुनील ने बताया कि उन्होंने सेना में रहते हुए ही रसायन मुक्त खेती करने की ठान ली थी। 

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दो साल पहले सेवानिवृत्त होते ही उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और जैविक खेती के क्षेत्र में काम कर रहे किसानों से जानकारी हासिल कर गन्ने की खेती शुरू की। साथ ही पशु चारा, गेहूं, जौ और मेथा आदि के अलावा आलू, गाजर, प्याज, शलजम, पालक, मेथी, मूली और चुकंदर आदि की खेती करनी शुरू की। पहले साल तो उत्पादन में कुछ गिरावट रही लेकिन दूसरे साल इसकी भरपाई हो गई। उन्होंने बताया कि जैविक गन्ने से बनने वाले गुड़ की गांव के साथ ही अब शहर से खूब मांग आ रही है।
 
रसायन का प्रयोग नहीं
फसलों में किसी भी तरह का रसायन प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके विकल्प के लिए जीवामृत यूज किया जा रहा है। किसान इसे घर पर ही आसानी से बना सकते हैं। इसके लिए 10 किलो गाय या भैंस का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, डेढ़ किलो बेसन, 2 किलो गुड़ का घोल और पीपल के पेड़ के नीचे की एक किलो मिट्टी को एक ड्रम में मिक्स कर दिया जाता है। सुबह-शाम दो समय इसे एक डंडे से चलाते हैं। 30 से 35 दिन में जीवामृत बनकर तैयार हो जाता है। जीवामृत को पानी के साथ फसल की सिंचाई में प्रयोग करते हैं। 

ऐसे तैयार करें जैविक खाद
सुनील कुमार ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा तैयार किए गए वेस्ट डीकंपोजर के जरिये किसान गोबर की खाद को जल्दी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए 200 लीटर पानी, दो किलो गुड के घोल में एक शीशी डीकंपोजर डाल दी जाती है। 10 दिन के अंदर वेस्ट डीकंपोजर सोल्यूशन तैयार हो जाता है। तैयार सोल्यूशन को गोबर, कूड़े करकट आदि पर डालकर जैविक खाद तैयार कर दिया जाता है।
 
सुनील ने बताया कि गुड़ तैयार करने के लिए पूरी एहतियात बरती जाती है। कोल्हू की पानी से पूरी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद ही जैविक गन्ने की पेराई कर उसके रस से गुड़ तैयार किया जाता है। गुड़ की सफाई भी सुकलाई पौधे या गाय के दूध आदि से की जाती है। साधारण गुड़ 60 रुपये किलो और तिल व मूंगफली मिक्स गुड़ 100 रुपये किलो बिक्री किया जाता है।

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