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जीवन में संयम और संस्कार जरूरी, मन के विकारों पर रखें नियंत्रण : भाव भूषण
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कैलाश पर्वत पर चल रहे भक्तांबर विधान पाठ में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के दसवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक, अर्पित जैन, महेंद्र जैन, आकाश जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा कमल कुमार ने की। दीप का प्रज्ज्वलन कमल जैन, शशी कला जैन, रश्मि जैन, कमला देवी जैन ने किया। बाल ब्रह्मचारी सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। विधान कराने वाले बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 85 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान के मध्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि यदि धर्म की बरसात हो रही हो तो अपवित्रता का छाता लगाकर मत जाना। उसमें भीगने का प्रयास करना जिससे कि हमारे अंदर की बुराइयां दूर होंगी और मन की सफाई होती रहेगी। जब भी मंदिर जाना तो अपने अहंकार का विसर्जन बाहर ही कर देना। अहं को लेकर जाओगे तो अर्हं का परिचय नहीं होगा। धर्म का जागरण करने से पहले अधर्म की मिट्टी को हटाना होगा।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में दुर्गुण ही पतन का मुख्य कारण बनते हैं। क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और निंदा जैसे अवगुण व्यक्ति की शांति छीन लेते हैं। विधान का विसर्जन गौतम जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन स्वप्निल मावी ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन महेंद्र जैन, अर्पित जैन ने किया।
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हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के दसवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक, अर्पित जैन, महेंद्र जैन, आकाश जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा कमल कुमार ने की। दीप का प्रज्ज्वलन कमल जैन, शशी कला जैन, रश्मि जैन, कमला देवी जैन ने किया। बाल ब्रह्मचारी सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। विधान कराने वाले बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 85 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
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विधान के मध्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि यदि धर्म की बरसात हो रही हो तो अपवित्रता का छाता लगाकर मत जाना। उसमें भीगने का प्रयास करना जिससे कि हमारे अंदर की बुराइयां दूर होंगी और मन की सफाई होती रहेगी। जब भी मंदिर जाना तो अपने अहंकार का विसर्जन बाहर ही कर देना। अहं को लेकर जाओगे तो अर्हं का परिचय नहीं होगा। धर्म का जागरण करने से पहले अधर्म की मिट्टी को हटाना होगा।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में दुर्गुण ही पतन का मुख्य कारण बनते हैं। क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और निंदा जैसे अवगुण व्यक्ति की शांति छीन लेते हैं। विधान का विसर्जन गौतम जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन स्वप्निल मावी ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन महेंद्र जैन, अर्पित जैन ने किया।

कैलाश पर्वत पर चल रहे भक्तांबर विधान पाठ में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद