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फर्जी प्रवक्ता के खिलाफ दर्ज होगी रिपोर्ट, विद्यालय की प्रबंध समिति भंग करने की संस्तुति

Fri, 31 Jul 2020 01:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2020 01:36 AM IST
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Report will be filed against fake spokesperson, recommendation for dissolution of school management committee
फर्जी प्रवक्ता के खिलाफ दर्ज होगी रिपोर्ट, विद्यालय की प्रबंध समिति भंग करने की संस्तुति
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मेरठ। फर्जी डिग्री से शिक्षक की नौकरी मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक गाजियाबाद ने फर्जी प्रवक्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने और विद्यालय की प्रबंध समिति को भंग करने की संस्तुति कर दी है। जांच में संस्था ने प्रबंधक को भी दोषी माना है। अमर उजाला ने 22 जुलाई के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक ओपी द्विवेदी ने गाजियाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक से बिंदुवार आख्या मांगी थी।
28 जुलाई को जिला विद्यालय निरीक्षक ने शिक्षा निदेशक को अपनी आख्या भेज दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि आरोपी विक्रम सिंह को 16-17 बार अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया मगर वह नहीं आए। लिहाजा उनकी सेवा समाप्त करने और अभियोग पंजीकृत करने की संस्तुति की जाती है। इनसे धन वसूली भी न्यायोचित लगती है। इस मामले संस्था प्रबंधक भी दोषी है और विद्यालय प्रबंध समिति भी भंग किए जाने की संस्तुति की जाती है।
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संयुक्त शिक्षा निदेशक ओपी द्विवेद्वी का कहना है कि उनकी और जिला विद्यालय निरीक्षक की तरफ से कार्रवाई के लिए लिखा जा चुका है। विद्यालय प्रबंधन आरोपी शिक्षक का रिश्तेदार है, इसलिए कार्रवाई नहीं कर रहा था। आरोपी की सेवा समाप्त होगी। वेतन वसूला जाएगा। पेंशन और जीपीएफ रुक गया है।
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यह है मामला
मामला किसान राष्ट्रीय इंटर कॉलेज चिरोड़ी गाजियाबाद का है। संजीव कुमार आत्रेय ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की थी कि किसान राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के विक्रम सिंह ने एमए की फर्जी मार्कशीट लगाकर प्रवक्ता की नौकरी पाई थी। गाजियाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक ने जांच शुरू कराई और मार्कशीट को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ सत्यापन के लिए भेजा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव मार्कशीट को फर्जी बताया। मुख्यमंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई थी और न ही प्रबन्ध समिति भंग की गई। इस बीच 31 मार्च 2020 को आरोपी शिक्षक सेवानिवृति भी हो गया। इस मामले में 5 नवम्बर 2014 से जांच चल रही है। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता शिक्षक का प्रमोशन नहीं किया और जून 2019 से वेतन भी नहीं दिया। विद्यालय में घुसने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
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