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Meerut News: मोह का त्याग कर आत्मकल्याण की ओर बढ़ना ही उत्तम आकिंचन
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दसलक्षण पर्व में जैन मंदिरों में उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दसलक्षण पर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को शहर के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की गई। असौड़ा हाउस स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पंडित पलाश जैन शास्त्री ने कहा कि संपूर्ण परिग्रह का त्याग ही उत्तम आकिंचन धर्म है। बाहरी वस्तुओं के साथ मन के राग-द्वेष, मोह और विकल्पों का त्याग कर आत्मा में रमण करना ही इस धर्म का सार है।
आनंदपुरी स्थित दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भगवान शांतिनाथ और पार्श्वनाथ को पांडुक शिलाओं पर विराजमान कर शांतिधारा की गई। तत्वार्थ सूत्र महामंडल विधान में 47 अर्घ्य अर्पित किए गए। विधानाचार्य नंदन शास्त्री ने कहा कि मोह संसार के दुखों का मूल कारण है। इसलिए अनावश्यक वस्तुओं के मोह का त्याग करना चाहिए।
फूलबाग कॉलोनी स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भगवान पारसनाथ का अभिषेक और शांतिधारा हुई। मंत्री नवीन जैन ने बताया कि आकिंचन धर्म अंतरंग और बहिरंग परिग्रह से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। शाम को सामूहिक आरती और शास्त्र सभा हुई। रात में जैन मिलन मेरठ महान की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया और विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दसलक्षण पर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को शहर के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की गई। असौड़ा हाउस स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पंडित पलाश जैन शास्त्री ने कहा कि संपूर्ण परिग्रह का त्याग ही उत्तम आकिंचन धर्म है। बाहरी वस्तुओं के साथ मन के राग-द्वेष, मोह और विकल्पों का त्याग कर आत्मा में रमण करना ही इस धर्म का सार है।
आनंदपुरी स्थित दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भगवान शांतिनाथ और पार्श्वनाथ को पांडुक शिलाओं पर विराजमान कर शांतिधारा की गई। तत्वार्थ सूत्र महामंडल विधान में 47 अर्घ्य अर्पित किए गए। विधानाचार्य नंदन शास्त्री ने कहा कि मोह संसार के दुखों का मूल कारण है। इसलिए अनावश्यक वस्तुओं के मोह का त्याग करना चाहिए।
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फूलबाग कॉलोनी स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भगवान पारसनाथ का अभिषेक और शांतिधारा हुई। मंत्री नवीन जैन ने बताया कि आकिंचन धर्म अंतरंग और बहिरंग परिग्रह से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। शाम को सामूहिक आरती और शास्त्र सभा हुई। रात में जैन मिलन मेरठ महान की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया और विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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