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एमएच स्टेशन हटाकर डीपीआर को मंजूरी  

Sat, 28 May 2016 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Sat, 28 May 2016 02:13 AM IST
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Remove the MH station DPR approved
मेट्रो ट्रेन के संबंध में बैठक लेते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
मिलेट्री हॉस्पिटल पर अब मेट्रो का स्टेशन ही नहीं बनेगा। इस संशोधन के बाद मेरठ में मेट्रो ट्रेन की फाइनल डीपीआर को हरी झंडी दे दी गई। कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई संशोधन मंजूर किए गए। अब डीपीआर शासन को भेजी जाएगी, वहां से मंजूरी मिलते ही इसे केंद्र सरकार को भेजकर स्वीकृति के लिए प्रयास होगा।
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शुक्रवार को आयुक्त सभागार में मेरठ मेट्रो रेल परियोजना की फाइनल डीपीआर कमिश्नर आलोक सिन्हा के समक्ष अनुमोदन के लिए पेश की गई। बैठक में डीएम पंकज यादव, एमडीए वीसी राजेश कुमार, सचिव अश्वनी कुमार शर्मा, चीफ इंजीनियर एससी मिश्रा, नोडल अधिकारी विवेक भास्कर तथा एलएमआरसी के मुख्य अभियंता रमेश कुमार, एसई शबीह हैदर आदि ने डीपीआर के सभी बिंदुओं को पेश किया। बताया कि मेट्रो केदो कॉरिडोर, दो डिपो और 29 स्टेशन होंगे। इनकी कुल लागत जनवरी 2016 के मूल्यों के आधार पर 11 हजार 450 करोड़ रुपये आएगी। मार्च 2017 से कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद है। विभिन्न संशोधन स्वीकृत किए गए। डीपीआर 31 मई तक शासन को भेज दी जाएगी।
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लो अब मिलेट्री हॉस्पिटल स्टेशन भी हुआ समाप्त
सैन्य
अधिकारियों के कहने पर डीपीआर में प्रस्तावित मिलेट्री हॉस्पिटल पर स्टेशन मंजूर किया गया था। पिछली बैठक में जब गांधी बाग से अंडर ग्राउंड की बजाय एलिवेटेड तथा मिलेट्री हॉस्पिटल पर बाएं की बजाय दाएं ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव आया तो सेना के अधिकारी अड़ गए। उन्होंने साफ कहा कि यह नहीं होगा। पहले इसका प्रस्ताव दो फिर देखा जाएगा। इस पर टीम ने भी अपना दांव खेल दिया। इस बार बैठक में मिलेट्री हॉस्पिटल का स्टेशन ही साफ कर दिया।
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कहा कि अब  रजबन बाजार और एमएच हॉस्पिटल स्टेशन एक हो गए हैं। इससे पहले प्रथम कॉरिडोर में पूर्व में चिह्नित माधवपुरम स्टेशन को हटा लिया है। ब्रह्मपुरी और माधवपुरम स्टेशन एक हो गए हैं। द्वितीय कॉरिडोर में पूर्व में चिह्नित गोकुलपुर स्टेशन को हटा लिया गया है। अब मेट्रो जागृति विहार एक्सटेंशन तक जाएगी।

ब्रह्मपुरी तक होगा एलिवेटेड स्टेशन
संजय
वन से ब्रह्मपुरी तक अब अंडरग्राउंड न होकर एलिवेटेड ट्रैक होगा। इस बाबत एलाइनमेंट में नया संशोधन किया गया है ताकि खर्च भी कम आए और जगह की आवश्यकता भी कम पडे़।

यह रहेगी कॉरिडोर की लंबाई
राइट्स
के महाप्रबंधक पीयूष कंसल ने बताया कि मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर की कुल लंबाई 19.7 किमी रहेगी। यह परतापुर से मोदीपुरम तक होगा। द्वितीय कॉरिडोर की लंबाई 15 किमी होगी, जोकि श्रद्धापुरी फेज-2 से जागृति विहार एक्सटेंशन तक होगा। उन्होंने बताया कि प्रथम कॉरिडोर में 11.6 किमी एलिवेटेड, 7.2 किमी अंडरग्राउड होगा और द्वितीय कॉरिडोर में 10.7 किमी एलिवेटेड और 3.5 किमी अंडरग्राउड होगा। उन्होंने बताया कि प्रथम कॉरिडोर में कुल 16 स्टेशन होंगे। इसमें 11 स्टेशन एलिवेटेड, 05 अंडरग्राउड होंगे तथा द्वितीय कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन होंगे, जिसमें 10 एलिवेटेड और 03 अंडरग्राउंड होंगे।  उन्होंने बताया कि प्रथम कॉरिडोर में मोदीपुरम में 10 हेक्टेयर का एक डिपोट होगा तथा द्वितीय कॉरिडोर में गोकलपुर में 12.2 हेक्टेयर का एक डिपोट होगा।

यह होंगे स्टेशन
प्रथम कॉरिडोर के स्टेशन
पहले
कॉरिडोर में 16 स्टेशन होंगे। इनमें परतापुर, डीएन पॉलिटेक्निक, रिठानी, शताब्दीनगर, संजय वन, ब्रह्मपुरी, बागपत रोड क्रासिंग, रेलवे रोड चौराहा, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, सोफीपुर, डोरली, गुरुकुल, पल्लवपुरम और मोदीपुरम हैं। 

द्वितीय कॉरिडोर के स्टेशन
इसमें
13 स्टेशन होंगे। इनमें श्रद्धापुरी फेज-2, कंकरखेड़ा, मेरठ कैंट, रजबन बाजार, बेगमपुल, बच्चा पार्क, शाहपीर गेट, हापुड़ अड्डा चौराहा, गांधी आश्रम, मंगलपांडे नगर, तेजगढ़ी, मेडिकल कॉलेज और जागृति विहार एक्सटेंशन है। एमडीएम उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की औसत दूरी प्रथम कॉरिडोर में 1.2 किमी और द्वितीय कॉरिडोर में 1.1 किमी होगी।

लागत 15 हजार करोड़
एलएमआरसी
के मुख्य अभियंता रमेश कुमार ने बताया कि मेट्रो की कुल अनुमानित लागत जनवरी 2016 के मूल्यों के आधार पर 11 हजार 220 करोड़ रुपये आएगीञ  तथा मार्च 2022 तक यह लागत बढ़कर करीब 14 हजार 928 करोड़ रुपये हो जाएगी। प्रोजेक्ट के निर्माण में केंद्र सरकार द्वारा 20 प्रतिशत, राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत दिया जाएगा। लोकल बॉडी द्वारा 2.39 प्रतिशत दिया जाएगा तथा वित्त संस्थाओं से 57.61 प्रतिशत ऋण लिया जाएगा।


कहां से आएगी इतनी जमीन
प्रोजेक्ट
का एफआईआरआर (फाइनेंशियल इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न) बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रॉपर्टी डेवलपमेंट के लिए 33 लाख वर्गमीटर क्षेत्र की जरूरत होगी। जिसके बाद एफआईआरआर  एमओयूडी के मानक के अनुरूप होकर 8.10 हो जाएगा। अहम बात यह है कि ऐसे प्रस्ताव को केंद्र सरकार तभी मंजूरी देता है जब उसका एफआईआरआर 8 प्रतिशत हो, लेकिन मेट्रो का एफआईआरआर अभी 3.25 तय हो पाया है। ऐसे यदि खर्च कम कर आय के साधन नहीं बढ़ाए गए तो यह प्रोजेक्ट शासन में धड़ाम हो जाएगा। टीम खर्च कम करने की कोशिश में है। बैठक में कैंट बोर्ड के एसीएफओ डीएस खत्री, कैंट बोर्ड के एई पीयूष गौतम, एसएसओ एलएंडसी कर्नल टीआर देवगन, आवास विकास परिषद के एक्सईएन आरके गुप्ता, राइटस के मैनेजर तरुण जैन, प्रियंका कटारिया, राइटस के एएम अमित कुमार,  चीफ इंजीनियर नगर निगम केबी वार्ष्णेय, एटीपी विवेक भास्कर, पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियन्ता राम अवतार शर्मा आदिम मौजूद रहे।
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