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भगवान के स्मरण से मिटते हैं जीवन के बंधन : भाव भूषण
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- 39वें दिन 426 परिवारों ने चढ़ाए श्रीफल
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 39वें दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मंदिर में भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ भगवान के मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने विधान स्थल पहुंचे, जहां सौधर्म इंद्र द्वारा भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान करने की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
शांतिधारा राजेश जैन, रश्मि जैन, आकांक्षा जैन और दिनेश जैन ने की। पंडित आशीष जैन शास्त्री ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ शांतिधारा संपन्न कराई।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि भगवान के नाम का श्रद्धापूर्वक स्मरण मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि सच्ची आस्था और भक्ति से कठिन से कठिन बंधन भी समाप्त हो जाते हैं तथा आत्मा को शांति और मोक्ष की दिशा मिलती है।
स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष सजे मंडल पर 426 परिवारों ने श्रद्धापूर्वक श्रीफल अर्पित किए। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्य एवं विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने बाहर से आए श्रद्धालुओं और विधान पात्रों का माला व मुकुट पहनाकर स्वागत और अभिनंदन किया।
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महाआरती, भजन संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। विजेताओं को संयम जैन ने सम्मानित किया। इस मौके पर क्षेत्राध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विनय कुमार जैन, रोहित जैन, शशांक जैन और महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 39वें दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मंदिर में भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ भगवान के मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने विधान स्थल पहुंचे, जहां सौधर्म इंद्र द्वारा भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान करने की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
शांतिधारा राजेश जैन, रश्मि जैन, आकांक्षा जैन और दिनेश जैन ने की। पंडित आशीष जैन शास्त्री ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ शांतिधारा संपन्न कराई।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि भगवान के नाम का श्रद्धापूर्वक स्मरण मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि सच्ची आस्था और भक्ति से कठिन से कठिन बंधन भी समाप्त हो जाते हैं तथा आत्मा को शांति और मोक्ष की दिशा मिलती है।
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स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष सजे मंडल पर 426 परिवारों ने श्रद्धापूर्वक श्रीफल अर्पित किए। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्य एवं विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने बाहर से आए श्रद्धालुओं और विधान पात्रों का माला व मुकुट पहनाकर स्वागत और अभिनंदन किया।
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महाआरती, भजन संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। विजेताओं को संयम जैन ने सम्मानित किया। इस मौके पर क्षेत्राध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विनय कुमार जैन, रोहित जैन, शशांक जैन और महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद