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धामपुर-अफजलगढ़ में मिला लाल सड़न रोग का प्रकोप
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बिजनौर में रेड रॉट रोग से ग्रसित गन्ना।
- फोटो : BIJNOR
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धामपुर-अफजलगढ़ में मिला लाल सड़न रोग का प्रकोप
बिजनौर। गन्ने की फसल में काफी संख्या में लाल सड़न रोग देखने को मिल रहा है। इससे उत्पादन तो प्रभावित होगा ही अगली फसल में भी यह रोग रहेगा। इसे लेकर शासन ने गन्ना विभाग के साथ-साथ चीनी मिल अफसरों को भी सचेत किया है। 0238 प्रजाति के साथ-साथ दूसरी प्रजाति का गन्ना भी बोने के लिए कहा जा रहा है। अगर किसी को 0238 प्रजाति का गन्ना बोना भी है तो गन्ने के ऊपर के हिस्से को ही बोया जाए। बसंतकालीन गन्ने की बुवाई अगले महीने शुरू होने वाली है। किसानों से किसी भी प्रजाति के गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने के लिए कहा जाता है, लेकिन बंपर पैदावार के लिए किसान 0238 प्रजाति के गन्ने को ही बो रहे हैं। इसका रकबा 98 प्रतिशत से अधिक है। धामपुर व अफजलगढ़ चीनी मिल क्षेत्र में 0238 में गन्ने में लाल सड़न रोग देखने को मिला है।
क्या होता है लाल सड़न रोग
गन्ने के अंदर का हिस्सा सड़कर लाल रंग का हो जाता है। इस हिस्से से बदबू आती है। इस रोग के होने पर फसल की वृद्धि रुक जाती है और चीनी रिकवरी भी प्रभावित होती है। इससे किसानों और चीनी मिलों दोनों को नुकसान होता है।
बचाव के तरीके
- रोगग्रस्त खेतों से बीज न लें, स्वस्थ नर्सरी से ही लें बीज, साथ ही 250 ग्राम थायोफिनाइट मिथाइल प्रति एकड़ से बीज का उपचार करें।
- पांच किलोग्राम ट्राईकोडर्मा, दो क्विंटल सड़ी गोबर की खाद मिलाकर दो या तीन दिन छाया में रखकर आखिरी जुताई के समय खेत में मिला दें।
- अपने गन्ने के रकबे में वैकल्पिक गन्ना प्रजाति को 0118 व 15023 की बुवाई करें, प्रति वर्ष एक तिहाई हिस्से में गन्ने के बीच की नर्सरी लगाएं।
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बिजनौर। गन्ने की फसल में काफी संख्या में लाल सड़न रोग देखने को मिल रहा है। इससे उत्पादन तो प्रभावित होगा ही अगली फसल में भी यह रोग रहेगा। इसे लेकर शासन ने गन्ना विभाग के साथ-साथ चीनी मिल अफसरों को भी सचेत किया है। 0238 प्रजाति के साथ-साथ दूसरी प्रजाति का गन्ना भी बोने के लिए कहा जा रहा है। अगर किसी को 0238 प्रजाति का गन्ना बोना भी है तो गन्ने के ऊपर के हिस्से को ही बोया जाए। बसंतकालीन गन्ने की बुवाई अगले महीने शुरू होने वाली है। किसानों से किसी भी प्रजाति के गन्ने का रकबा 40 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने के लिए कहा जाता है, लेकिन बंपर पैदावार के लिए किसान 0238 प्रजाति के गन्ने को ही बो रहे हैं। इसका रकबा 98 प्रतिशत से अधिक है। धामपुर व अफजलगढ़ चीनी मिल क्षेत्र में 0238 में गन्ने में लाल सड़न रोग देखने को मिला है।
क्या होता है लाल सड़न रोग
गन्ने के अंदर का हिस्सा सड़कर लाल रंग का हो जाता है। इस हिस्से से बदबू आती है। इस रोग के होने पर फसल की वृद्धि रुक जाती है और चीनी रिकवरी भी प्रभावित होती है। इससे किसानों और चीनी मिलों दोनों को नुकसान होता है।
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बचाव के तरीके
- रोगग्रस्त खेतों से बीज न लें, स्वस्थ नर्सरी से ही लें बीज, साथ ही 250 ग्राम थायोफिनाइट मिथाइल प्रति एकड़ से बीज का उपचार करें।
- पांच किलोग्राम ट्राईकोडर्मा, दो क्विंटल सड़ी गोबर की खाद मिलाकर दो या तीन दिन छाया में रखकर आखिरी जुताई के समय खेत में मिला दें।
- अपने गन्ने के रकबे में वैकल्पिक गन्ना प्रजाति को 0118 व 15023 की बुवाई करें, प्रति वर्ष एक तिहाई हिस्से में गन्ने के बीच की नर्सरी लगाएं।