पालिका चेयरपर्सन व ईओ के खिलाफ जारी होगी आरसी, 35 कर्मियों का रुका है तीन माह का वेतन
- एसटीपी पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का नहीं किया भुगतान
- सहायक श्रमायुक्त ने आरसी वसूली का दिया आदेश, डीएम को भेजा पत्र
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काली नदी पर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर कार्यरत रहे कर्मचारी मोहल्ला आबकारी निवासी आकाश ने वेतन का भुगतान नहीं होने पर सहायक श्रमायुक्त के यहां वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद 31 दिसंबर 2019 को सहायक श्रमायुक्त ने कर्मचारियों का सात लाख 15 हजार 500 रुपये का भुगतान 30 दिन के भीतर करने के आदेश दिए।
आदेश के बावजूद चेयरपर्सन और ईओ ने भुगतान नहीं किया। इस पर प्राधिकारी, वेतन भुगतान अधिनियम 1936 एवं सहायक श्रमायुक्त प्रतिभा तिवारी ने प्रतिवादी नगर पालिका चेयरपर्सन एवं ईओ के खिलाफ आरसी जारी करने के आदेश दिए हैं।
35 कर्मियों का रुका है तीन माह का वेतन
काली नदी पर स्थापित एसटीपी का संचालन गाजियाबाद के ठेकेदार द्वारा किया जा रहा था। प्लांट पर कार्यरत करीब 35 कर्मचारियों को मार्च, अप्रैल और मई 2018 के वेतन का भुगतान नहीं किया गया। कर्मचारियों ने ठेकेदार के खिलाफ शिकायत की।
शिकायतकर्ता आकाश ने बताया कि नगर पालिका ने ठेकेदार को ही भुगतान नहीं किया। इस पर ठेकेदार ने भुगतान से हाथ खड़े कर दिए। बाद में कर्मचारियों ने नगर पालिका चेयरपर्सन और ईओ के खिलाफ सहायक श्रमायुक्त के यहां वाद दायर किया।
चेयरपर्सन ने सहायक अधिष्ठान लिपिक को हटाया
चेयरपर्सन और ईओ के खिलाफ आरसी जारी होने के बाद नगर पालिका में हड़कंप मचा है। चेयरपर्सन ने सहायक अधिष्ठान लिपिक का कार्य देख रहे मीटर रीडर कैलाश नारायण को पटल से हटा दिया है। पालिका अध्यक्ष अंजू अग्रवाल ने बताया कि सहायक श्रमायुक्त से वसूली प्रमाणपत्र जारी होने का आदेश पालिका को 11 जून को मिला है।
15 जून को उन्होंने सक्षम न्यायालय में अपील करने के लिए प्रभारी जलकल अभियंता/ईओ को आदेश दिए थे। ईओ की संस्तुति पर उन्होंने 22 जून को सहायक अधिष्ठान लिपिक का कार्य देख रहे मीटर रीडर कैलाश नारायण को उनके मूल पद पर तैनात करने के आदेश जारी कर दिए।
इसके अलावा उन्होंने जलकल के सेक्टर संख्या एक का कार्य देख रहे निर्माण लिपिक मनोज कुमार को सेक्टर एक से मुक्त कर दिया है। किराया पटल देख रहे लिपिक मुकेश कुमार को जलकल विभाग के अधिष्ठान लिपिक के पद पर स्थानांतरित कर दिया है। यदि आरसी जारी होने वाले प्रकरण में नगर पालिका को आर्थिक हानि होती है तो उसके लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाएगा।