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कालाबाजारी: सो गए पहरेदार, मनमर्जी से राशन बांट रहे कोटेदार, लोगों को समय पर नहीं मिल रहा  गेहूं और चावल

Mon, 18 Dec 2023 11:46 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 18 Dec 2023 11:46 AM IST
सार

सरकारी राशन की कालाबाजारी को रोकने के लिए लगाए गए कर्मचारी खुद ही गायब रहते हैं। नतीजन लोगों को मन मर्जी का राशन बांटा जा रहा है।

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ration scam: porters are distributing ration as per their wish, people are not getting wheat and rice on time
राशन डिपो की दुकान में पड़ा गेहूं का स्टॉक। - फोटो : Fatehabad

विस्तार

सरकारी राशन की कालाबाजारी न हो और प्रत्येक परिवार को पूरा राशन मिले। इसकी निगरानी को लगाए गए कर्मचारी नदारद हैं। नतीजतन, कई राशन डीलर कार्ड धारकों को कम राशन दे रहे हैं, जिसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की गई है। सरकारी गेहूं और चावल की कालाबाजारी के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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जिले में 890 से अधिक सरकारी राशन की दुकानें हैं। जिले में 5.50 लाख राशन कार्ड हैं। प्रत्येक माह 24 लाख 52 हजार लोगों के नाम से राशन वितरण किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के नाम दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल वितरण किया जाता है।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी को राशन मिले और कालाबाजारी न हो इसको लेकर भी सरकार ने काफी प्रयास किए हैं, लेकिन अभी भी काफी लोगों तक पूरा राशन नहीं पहुंच पा रहा है।
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नियमानुसार निगरानी में लगाए गए कर्मचारियों को प्रतिदिन राशन वितरण के समय दुकान पर तैनात रहना चाहिए, ताकि राशन डीलर कार्ड धारकों को पूरा राशन दे। इसकी पूरी रिपोर्ट कर्मचारी के हस्ताक्षर से जारी होती है। शिकायतों के बाद भी जिलापूर्ति विभाग के अधिकारी व्यवस्था में सुधार नहीं करा पा रहे हैं।

निगरानी में निगम और देहात में ग्राम पंचायत अधिकारी
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक महानगर में नगर निगम, मवाना और सरधना में नगर पालिका कर्मचारी, नगर पंचायतों में पंचायत कर्मचारी और गांवों में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर ग्राम पंचायत सचिव की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी कर्मचारी सरकारी रिपोर्ट में अपने सामने राशन का वितरण दर्शाते हैं।

हर महीने पांच से 20 तारीख तक खुलनी चाहिए दुकानें
प्रत्येक कार्ड धारक को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन मिले, इसके लिए सरकार ने दुकानें खोलने की तिथि और समय भी निर्धारित किया है। नियमानुसार हर माह पांच से 20 तारीख तक प्रतिदिन दुकान खुलनी चाहिए।

इतना ही नहीं प्रत्येक दिन कम से 300 कार्ड धारकों को राशन वितरित किया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि इस आदेश का कुछ राशन डीलर अनुपालन कर रहे हैं, जबकि अधिकतर दुकानदार न तो समय पर दुकानें खोलते हैं और न ही पूरा राशन दे रहे हैं।

सुधार नहीं हो पा रहा: जिलापूर्ति अधिकारी
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने का मतलब अपने सामने राशन वितरण करना है। काफी कर्मचारी ऐसे हैं जो मौके पर मिलते ही नहीं हैं। कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन सुधार नहीं हो सका है। - विनय सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी।

केस एक
नई बस्ती लल्लापुरा निवासी शकुंतला ने बताया कि परिवार में पांच सदस्य हैं। साबुन गोदाम की केवीएस राशन की दुकान से राशन लेते हैं। एक यूनिट का कम राशन दिया जाता है। शिकायत करते हैं तो कोई सुनता ही नहीं।

केस दो
श्यामनगर निवासी जैबुन्निशा ने बताया कि श्यामनगर में ही गीता गुप्ता की दुकान से राशन लेते हैं। कई बार चावल मिलता ही नहीं है। दुकान कहते हैं कि चावल आया ही नहीं है।

केस तीन
ब्रह्मपुरी निवासी रज्जो देवी ने बताया कि कपिल शर्मा की दुकान से राशन लेते हैं। दुकान समय पर नहीं खुलती। परिवार में तीन सदस्य हैं। कभी पूरा राशन नहीं मिलता है। शिकायत करेंगे तो राशन कार्ड खत्म करा दिया जाएगा।

केस चार
माधवपुरम निवासी शीतला देवी बताती हैं कि परिवार में तो चार सदस्य हैं। राशन में दो अन्य लोगों के नाम हैं। राशन डीलर नरेश है, अंगूठा हमसे लगवाता है और दो अन्य लोगों का राशन हजम कर जाता है।

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