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भाजपा में और सुलग गई बगावत की आग, इन दो सीटों पर घमासान बरकरार

Fri, 20 Jan 2017 07:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Fri, 20 Jan 2017 07:59 PM IST
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rarniti aur bagaavat
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

भाजपा में प्रत्याशी चयन पर विरोध बढ़ता जा रहा है। टिकट न मिलने से मायूस दावेदार अब बगावत पर उतर आए हैं। यह नाराजगी कहीं न कहीं भाजपा के चुनाव को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में विपक्ष की रणनीति और अपनों की बगावत को साधना आसान नजर नहीं आ रहा है।

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भाजपा ने अभी 149 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। जिसमें मेरठ की भी सात सीटों में से छह पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। इनमें कैंट सीट पर जहां अभी तक पार्टी निर्णय नहीं ले पायी है, तो हस्तिनापुर और सिवालखास में बगावत शुरू हो गयी है। हस्तिनापुर से पूर्व विधायक गोपाल काली शुक्रवार को बड़ी पंचायत कर रहे हैं, जिसमें वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं इसका फैसला लेंगे। लेकिन जिस तरह गोपाल काली ने पर्चा ले लिया है और पंचायत बुलायी है। उससे तय माना जा रहा है कि वह चुनाव लड़ेंगे।
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वहीं, सिवालखास में सांसद सत्यपाल सिंह के खास संजय कुमार ने पर्चा लिया है। जबकि पं. सुनील भराला समर्थकों के साथ लगातार बैठकें कर विरोध दर्ज करा रहे हैं। सुनील भराला के समर्थन में परशुराम स्वाभिमान सेना के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। सुनील भराला भी निर्दलीय लड़ने की चेतावनी दे चुके हैं।  कैंट में भी कमोबेश यही स्थिति बनती नजर आ रही है। यहां भी आपसी गुटबाजी के बीच माहौल लगातार भाजपा के विपरीत बनता नजर आ रहा है। इसी खींचतान में पार्टी नेतृत्व अब तक प्रत्याशी तक घोषित नहीं कर पाया है। इन परिस्थितियों में जब चुनाव में विपक्षी दलों के प्रत्याशी और कार्यकर्ता हमला बोलेंगे तो भाजपा को दो मोर्चों पर लड़ना होगा। एक तरफ जहां विपक्षी दलों से जूझना होगा तो अपनों की बगावत का भी सामना करना पड़ेगा।
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करवा रहे पुतला दहन
भाजपा के कुछ नेताओं ने विरोध प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। कुछ गांवों में अपने खास समर्थकों से पुतला फुंकवाते हुए फोटो पोस्ट किए जा रहे हैं, तो कुछ विरोध की विज्ञप्ति जारी कराकर दबाव बना रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर पार्टी सूत्रों का कहना है कि सिवालखास में टिकट बदलना मुश्किल है। जबकि हस्तिनापुर की रिपोर्ट हाईकमान ने तलब की है और उस पर पुनर्विचार हो रहा है। सिवालखास के बारे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि स्थानीय प्रत्याशी होने से पार्टी नेतृत्व को लाभ मिलेगा।

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