{"_id":"60aeb2d28ebc3e751e1c7549","slug":"rapid-rail-154-location-sensitive-in-1500-meters-city-news-mrt5400153118","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैपिड रेल : 1500 मीटर में 154 स्थान संवेदनशील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैपिड रेल : 1500 मीटर में 154 स्थान संवेदनशील
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रैपिड रेल : 1500 मीटर में 154 स्थान संवेदनशील
मेरठ। दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल का पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा, इस पर स्टडी की गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने इसकी रिपोर्ट एशियन विकास बैंक को भेजी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मेरठ में चलने वाले रूट में 1500 मीटर में 154 स्थान संवेदनशील हैं। इसमें स्कूल, कॉलेज, इमारत आदि शामिल हैं। यहां कार्य करने से पहले एजेंसी को सुरक्षा बरतनी होगी। मेरठ से दिल्ली तक दस हजार 292 पेड़ काटे जाएंगे। इनमें से काफी पेड़ कट भी चुके हैं।
एशियन विकास बैंक प्रोजेक्ट के लिए एनसीआरटीसी को वित्तीय सहायता मुहैया करा रहा है। इसलिए पूरी जानकारी दी गई है। पर्यावरण प्रभाव आकलन में निर्माण कार्य और संचालन के दौरान शोरगुल, पेड़ों के कटान, लोगों संवाद आदि तैयार किया गया है। जिससे निर्माण कार्य के समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो सके। सबसे अधिक चुनौती 5.8 किमी के लिए बनाई जाने वाली टनल को लेकर है। मेरठ शहर के पुराने इलाके से गुजरने वाले इस रूट में सबसे अधिक पुराने समय के मकान, दुकान बने हैं। यहां कार्य करते समय सबसे अधिक कंपन होगा।
भूमिगत स्टेशन रूट पर प्रमुख स्थान
फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज, कॉलेज में स्थित मस्जिद, शहीद स्मारक, तहसील, भैसाली बस अड्डा, सोतीगंज इलाका, डीएन डिग्री कॉलेज, शाही ईदगाह आदि स्थित हैं।
ये है पर्यावरण प्रबंध योजना
इस प्रोजेक्ट में स्टडी करने के बाद पर्यावरण प्रबंध योजना तैयार की गई है, जिसमें शोर को कम करने, पेड़ कटने के बाद उसी पूर्ति करने जैसे विषय शामिल है। जिससे इन कार्यों को करने के बाद पर्यावरण प्रबंध योजना सफल होगी।
विज्ञापन
पेड़ों का कटान - आरआरटीएस के रूट पर 0.5 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता होगी। इस वन भूमि क्षेत्र में सड़क किनारे बागवानी लगाई जा रही है। इसके अलावा स्टडी में बताया गया है कि दस हजार 292 पेड़ कटने की संभावना है। 3683 पेड़ रोड ब्लैक टॉपिंग के कारण बाकी 6609 रैपिड रेल रूट के कारण प्रभावित होंगे।
शोरगुल को कम करना - निर्माण चरण में 106 संवेदनशील स्थानों पर शोर होगा। इसे कम करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। रैपिड रेल संचालन के समय शोर अवरोधक लगाए जाएंगे जो 13 से 17 डीबीए तक शोर को कम करेंगे।
विज्ञापन
मेरठ। दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल का पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा, इस पर स्टडी की गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने इसकी रिपोर्ट एशियन विकास बैंक को भेजी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मेरठ में चलने वाले रूट में 1500 मीटर में 154 स्थान संवेदनशील हैं। इसमें स्कूल, कॉलेज, इमारत आदि शामिल हैं। यहां कार्य करने से पहले एजेंसी को सुरक्षा बरतनी होगी। मेरठ से दिल्ली तक दस हजार 292 पेड़ काटे जाएंगे। इनमें से काफी पेड़ कट भी चुके हैं।
एशियन विकास बैंक प्रोजेक्ट के लिए एनसीआरटीसी को वित्तीय सहायता मुहैया करा रहा है। इसलिए पूरी जानकारी दी गई है। पर्यावरण प्रभाव आकलन में निर्माण कार्य और संचालन के दौरान शोरगुल, पेड़ों के कटान, लोगों संवाद आदि तैयार किया गया है। जिससे निर्माण कार्य के समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो सके। सबसे अधिक चुनौती 5.8 किमी के लिए बनाई जाने वाली टनल को लेकर है। मेरठ शहर के पुराने इलाके से गुजरने वाले इस रूट में सबसे अधिक पुराने समय के मकान, दुकान बने हैं। यहां कार्य करते समय सबसे अधिक कंपन होगा।
विज्ञापन
भूमिगत स्टेशन रूट पर प्रमुख स्थान
फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज, कॉलेज में स्थित मस्जिद, शहीद स्मारक, तहसील, भैसाली बस अड्डा, सोतीगंज इलाका, डीएन डिग्री कॉलेज, शाही ईदगाह आदि स्थित हैं।
ये है पर्यावरण प्रबंध योजना
इस प्रोजेक्ट में स्टडी करने के बाद पर्यावरण प्रबंध योजना तैयार की गई है, जिसमें शोर को कम करने, पेड़ कटने के बाद उसी पूर्ति करने जैसे विषय शामिल है। जिससे इन कार्यों को करने के बाद पर्यावरण प्रबंध योजना सफल होगी।
विज्ञापन
पेड़ों का कटान - आरआरटीएस के रूट पर 0.5 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता होगी। इस वन भूमि क्षेत्र में सड़क किनारे बागवानी लगाई जा रही है। इसके अलावा स्टडी में बताया गया है कि दस हजार 292 पेड़ कटने की संभावना है। 3683 पेड़ रोड ब्लैक टॉपिंग के कारण बाकी 6609 रैपिड रेल रूट के कारण प्रभावित होंगे।
शोरगुल को कम करना - निर्माण चरण में 106 संवेदनशील स्थानों पर शोर होगा। इसे कम करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। रैपिड रेल संचालन के समय शोर अवरोधक लगाए जाएंगे जो 13 से 17 डीबीए तक शोर को कम करेंगे।