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निर्माण कार्य तेजी पर: मेरठ सेंट्रल स्टेशन पर होंगे चार ट्रैक, मेट्रो-रैपिड दोनों रुकेंगी, टीपीनगर तिराहे से आगे भूमिगत स्टेशन का निर्माण शुरू

Sat, 04 Sep 2021 01:14 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 04 Sep 2021 01:14 PM IST
सार

मेरठ में तीनों भूमिगत स्टेशन पर कार्य शुरू कर दिया गया है। मेरठ सेंट्रल भूमिगत स्टेशन पर आइलैंड टाइप केप्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। जिसमे ट्रेन से चढ़ने और उतरने के लिए प्लेटफार्म को बीच में बनाया जा रहा है।

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Rapid : four tracks at Meerut Central station, both Metro-Rapid will stop
मेरठ: रैपिड रेल - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ में तीनों भूमिगत स्टेशन पर कार्य शुरू कर दिया गया है। रैपिड रेल के लिए भैसाली, बेगमपुल और मेरठ सेंट्रल को भूमिगत स्टेशन बनाया जाना है। मेरठ सेंट्रल स्टेशन पर रैपिड और मेट्रो दोनों का स्टॉपेज होगा। 

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मेरठ सेंट्रल भूमिगत स्टेशन पर आइलैंड टाइप के प्लेटफ़ार्म बनाए जा रहे हैं। जिसमे ट्रेन से चढ़ने और उतरने के लिए प्लेटफार्म को बीच में बनाया जा रहा है। इस स्टेशन पर कुल चार ट्रैक बनाए जा रहे हैं। जिसमें से दो ट्रैक प्लेटफार्म के दोनों ओर होंगे और मेरठ मेट्रो सेवा की ट्रेन यहां पर रुकेगी।
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बाकी के दो ट्रैक आरआरटीएस ट्रेन सेवा के लिए होंगे जो बिना रुके आगे चले जाएंगे। यह स्टेशन विभिन्न यात्री सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें आने और जाने के लिए लिफ्ट व एस्केलेटर, सीढ़ियां, एलईडी, डिस्प्ले बोर्ड, आसपास के स्टेशन के लिए रूट मैप आदि के अलावा सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी होंगे। 
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मेरठ सेंट्रल भूमिगत स्टेशन के लिए डायफ्राम वाल (डी-वॉल) का निर्माण शुरू हो गया। इस प्रक्रिया के अंतर्गत इस भूमिगत स्टेशन के चारों ओर 23 मीटर (8 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर) और पांच मीटर चौड़े विशाल रीइफोरसमेन्ट केज को भूमिगत उतारा जा रहा है। 

इसके बाद कंक्रीटिंग करके उसे जमीन के नीचे जोड़ दिया जाएगा। इसका आकार लगभग 260 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। फिक्स किए जाने वाले प्रत्येक रीइफोरसमेन्ट केज का वजन लगभग 22 टन है। इस स्टेशन का प्लेटफार्म लेवल जमीन से लगभग 16 मीटर गहरा बनाया जा रहा है।  

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इसलिए जरूरी है डी-वॉल
भूमिगत स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया में डी-वाल भूमिगत हिस्से में मिट्टी की खोदाई करते समय एक मजबूत ढाल या फ्रेम की तरह काम करता है। जिससे मिट्टी के गिरने की संभावना कम हो जाती है और यह पानी के रिसाव को भी रोकता है। मेरठ सेंट्रल का निर्माण टॉप-डाउन प्रणाली से किया जाएगा। जिसमे निर्माण कार्य ऊपर से नीचे की तरफ किया जाता है।

दोनों छोर की डी-वाल (डायफ्राम वाल) या बाहरी दीवार बनने के बाद छत के निर्माण के लिए पहले लगभग 1.5 मीटर मोटाई वाले अस्थाई स्टील कॉलम निर्धारित स्थानों पर गहरी खुदाई करके डाले जाते है। इसके बाद डी वाल से  छत बनाई जाती है जिसे अस्थायी स्टील कॉलम से सपोर्ट मिलता है और फिर ऊपरी छत बनने के बाद भूमिगत स्टेशन के लिए खोदाई करके मिट्टी निकाली जाती है। मिट्टी निकालने के बाद स्टेशन का प्रथम तल का फ्लोर बनाया जाता है। ये फ्लोर भूमिगत स्टेशन का कोनकॉर्स बन जाता है।

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