राजस्नेह मामला: कई खातों में ट्रांसफर होती रही लोन की रकम, सीबीआई के छापे के बाद खुले कई बड़े राज
सीबीआई की छापेमारी के बाद कई बड़े राज सामने आए हैं। बताया गया है कि कर्ज के रूप में ली गई रकम अवैध तरीके से कई जगह उपयोग की गई। खाते से आठ से दस माह में पूरा पैसा निकाल लिया गया।
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सीबीआई के छापे के बाद राजस्नेह ऑटोमोबाइल से जुड़े राज दिन प्रतिदिन खुल रहे हैं। बताया जा रहा है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शिकायत पर सीबीआई ने जिन 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है, उनमें से एक व्यक्ति अज्ञात में है। पूरे खेल में उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है। बैंक के पांच अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। लोन ली गई रकम कई खातों में जाती रही, जानकारी के बावजूद बैंक क्रेडिट लिमिट बढ़ाता चला गया।
पीएनबी ने वर्धमान रोलर फ्लोर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को जो लोन दिया था, वह अब 81 करोड़ से अधिक का हो चुका है। बैंक अधिकारियों का दावा है कि जिस मद में पैसा लिया गया वह उस मद में खर्च नहीं किया गया।
कर्ज के रूप में ली गई रकम अवैध तरीके से कई जगह उपयोग की गई। खाते से आठ से दस माह में पूरा पैसा निकाल लिया गया। बैंक की रिपोर्ट में यह भी है कि जनवरी से सितंबर 2014 के मध्य 16 बार में 4 लाख से 25 लाख तक की रकम एक व्यक्ति को नकद दी गई। मामले में बैंक की लापरवाही भी सामने आ रही है।
पार्टनर, गारंटरों और फर्म के खातों में पैसा जाता रहा, लेकिन बैंक मौन रहा। यही नहीं जानकारी होने के बाद भी बैंक वर्ष 2014 से 2016 के बीच क्रेडिट लिमिट भी बढ़ाता रहा। वर्ष 2013 में वर्धमान रोलर फ्लोर मिल के नाम पर 8.40 करोड़ लोन की रकम थी। वर्ष 2016 में बैंक ने लोन की क्रेडिट लिमिट बढ़ाकर 21.40 करोड़ कर दी। इसके लिए बैंक ने सात संपत्तियों को कोलेटरल किया था।
पूरी जांच और लोन स्वीकृत करने की प्रक्रिया में बैंक के पांच अधिकारियों की भूमिका रही है। 2013 में लोन के रूप में स्वीकृत रकम को किस मद में खर्च किया गया, इसकी जानकारी भी बैंक ने सीबीआई को नहीं दी।
इन संपत्तियों को किया था कोलेटरल
बैंक ने मोहकमपुर स्थित फैक्टरी, बिल्डिंग, सूर्या पैलेस का प्लाट नंबर डी-121, डी -122, डी-135, तीन आवासीय डुपलेक्स डी-129, डी-131 और डी-132 और खड़ौली स्थित प्लाट, प्रेमपुरी रेलवे रोड स्थित मकान को लोन देते वक्त कोलेटरल के रूप में लिया था।
बैंक ने इस मामले में की तीनतरफा कार्यवाही
वर्ष 2018 में जब किस्त नहीं चुकाई तब बैंक ने तीनतरफा कार्यवाही अपनाई। एक तरफ डीआरटी में शिकायत की तो दूसरी तरफ सर्फेसी के अंतर्गत कार्यवाही की गई। वर्ष 2020 में बैंक ने सीबीआई में भी मामले की शिकायत कर दी। अब सभी मामलों में जांच प्रक्रिया प्रगति पर है। बैंक की ओर से दिए गए लोन के विषय में भी सीबीआई जांच कर रही है।
परिवार की चल अचल संपत्ति 35 करोड़ से अधिक
पूरे मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें वर्धमान रोलर फ्लोर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, डायरेक्टर मनोज कुमार कुमार गुप्ता, डायरेक्टर अशोक कुमार जैन, डायरेक्ट अनिल कुमार जैन, डायरेक्टर राजेश कुमार जैन, गारंटर पूनम जैन, गारंटर साधना जैन, गारंटर संगीता जैन, गारंटर अंशुल जैन, गारंटर अंकित जैन, मेसर्स राजस्नेह ऑटो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं। बैंक के अनुसार कंपनी के डायरेक्टर और गारंटरों की चल-अचल संपत्ति 35 करोड़ से अधिक दिखाई गई है।
बोली लगाने वाले कुछ लोगों का पैसा बैंक ने वापस किया
बैंक ने कई प्लाट और मकानों पर कब्जा करने का दावा किया है, लेकिन इसके बाद भी संपत्ति मालिकों के कब्जे में बताई जा रही है। ऐसे में नीलामी लगाने वाले दर्जनों लोगों का पैसा फंस गया है। बैंक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैंक ने तीन से चार लोगों का पैसा वापस भी कर दिया है। अभी तक बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो बैंक से पैसा वापस लेने को तैयार नहीं हैं।