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कुलपति आवास में शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
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कुलपति आवास में शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति आवास पर ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत रविवार को कुलपति आवास में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का शुभारंभ किया गया। एक और सिस्टम भी दो दिन में शुरू हो जाएगा। विवि परिसर में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की संख्या 48 हो गई है।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा, उनकी पत्नी डॉ. सविता तनेजा और प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने गायत्री मंत्र का पाठ कर और मिट्टी के कलश से जल डालकर शुभारंभ किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अभियंता मनीष मिश्रा और निर्माण कराने वाले इंजीनियर बीडी शर्मा मौजूद रहे।
विवि में वर्ष 2010 से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने शुरू हुए। महाराणा प्रताप हॉस्टल और न्यू ब्वॉयज हॉस्टल का पानी भी सिस्टम के जरिए जमीन को रिचार्ज कर रहा है। इसके चलते यहां अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अब यहां जून में भी जल स्तर 250 फीट से कम नहीं हो रहा है। विवि के सीनियर इंजीनियर मनीष मिश्रा बताते हैं कि बरसात से पहले हर साल सिस्टम की सर्विस की जाती है। वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने के बाद इसे नालियों, पाइप लाइनों के माध्यम से इस प्रकार संग्रहीत किया जाता है कि यह जमीन में पहुंचकर वाटर लेवल को बढ़ाता है।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति आवास पर ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत रविवार को कुलपति आवास में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का शुभारंभ किया गया। एक और सिस्टम भी दो दिन में शुरू हो जाएगा। विवि परिसर में अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की संख्या 48 हो गई है।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा, उनकी पत्नी डॉ. सविता तनेजा और प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने गायत्री मंत्र का पाठ कर और मिट्टी के कलश से जल डालकर शुभारंभ किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अभियंता मनीष मिश्रा और निर्माण कराने वाले इंजीनियर बीडी शर्मा मौजूद रहे।
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विवि में वर्ष 2010 से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने शुरू हुए। महाराणा प्रताप हॉस्टल और न्यू ब्वॉयज हॉस्टल का पानी भी सिस्टम के जरिए जमीन को रिचार्ज कर रहा है। इसके चलते यहां अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अब यहां जून में भी जल स्तर 250 फीट से कम नहीं हो रहा है। विवि के सीनियर इंजीनियर मनीष मिश्रा बताते हैं कि बरसात से पहले हर साल सिस्टम की सर्विस की जाती है। वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने के बाद इसे नालियों, पाइप लाइनों के माध्यम से इस प्रकार संग्रहीत किया जाता है कि यह जमीन में पहुंचकर वाटर लेवल को बढ़ाता है।
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