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आरएएफ आज करेगी अपनी सेवा पर गर्व
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:09 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) शनिवार को 108 वाहिनी परिसर में अपनी 25 साल की त्वरित सेवा पर गर्व करेगी। जवान, अधिकारी और उनके परिवार इस बात के गवाह बनेंगे। इस दौरान शानदार परेड और बेहतर अनुशासन सिल्वर जुबली समारोह को भव्य बनाएगा। जवानों को उनकी सेवा के लिए मेडल और टॉफी दी जाएंगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जवान अपनी कला का हुनर दिखाएंगे। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं। विशिष्ट अतिथि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जनसंचार मनोज सिन्हा होंगे। डीजी सीआरपीएफ भी मौजूद रहेंगे।
कार्यक्रम सुबह साढ़े नौ बजे वेदव्यासपुरी स्थित 108 वाहिनी परिसर में शुरू होगा। 10:05 बजे मुख्य अतिथि परेड की सलामी लेंगे। इसके बाद टीम के रूप में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम का सम्मान किया जाएगा। बेस्ट कोबरा ऑपरेशन 205 कोबरा को, बेस्ट ऑपरेशन सीआरपीएफ बटालियन नार्थ ईस्ट 147 बटालियन सीआरपीएफ को, जम्मू-कश्मीर में बेस्ट सीआरपीएफ बटालियन का खिताब 180 बटालियन सीआरपीएफ को दिया जाएगा। इसके अलावा बेस्ट ऑपरेशन सीआरपीएफ इन एलडब्लूई 159 बटालियन सीआरपीएफ को, बेस्ट कोस्ट इफेक्टिव आरएएफ बटालियन की ट्रॉफी 104 बटालियन, बेस्ट आरएएफ बटालियन फोर ऑपरेशन 101 बटालियन को और बेस्ट आरएएफ बटालियन फॉर एडीएम की ट्रॉफी 100 बटालियन आरएएफ को दी जाएगी।
गीत की ये धुन बजेंगी
समारोह के दौरान देशभक्ति का माहौल होगा। परेड एंट्री के वक्त कदम कदम बढ़ाए जा गीत की धुन बजेगी। मार्च पास्ट में सारे जहां से अच्छा गीत बजेगा। सीआरपीएफ गीत ऐसा देश कभी न देखा और सोने की चिड़िया गीत की धुन भी बजेगी।
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सूचना मिलते ही बन जाती है शांति की वाहक
आरएएफ का संचालन बिना समय गंवाए के सिद्धांत पर आधारित है। सात अक्तूबर 1992 को इसकी स्थापना हुई। यह सूचना मिलते ही त्वरित गति से एक्शन में आ जाती है और शांति का वाहक बन जाती है। मौके पर तुरंत स्थिति को नियंत्रित करती है। दंगा हो या सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का अंदेशा नीले विघटनकारी पैटर्न की पोशाक में जब जवान पहुंचते हैं तो स्थिति पर नियंत्रण होने में देर नहीं लगती। देश में आरएएफ की 10 वाहिनी हैं। देश में नहीं आरएएफ ने संयुक्त राष्ट शांति मिशन हैती और लाइबेरिया में भी सेवा दी है।
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कार्यक्रम सुबह साढ़े नौ बजे वेदव्यासपुरी स्थित 108 वाहिनी परिसर में शुरू होगा। 10:05 बजे मुख्य अतिथि परेड की सलामी लेंगे। इसके बाद टीम के रूप में शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम का सम्मान किया जाएगा। बेस्ट कोबरा ऑपरेशन 205 कोबरा को, बेस्ट ऑपरेशन सीआरपीएफ बटालियन नार्थ ईस्ट 147 बटालियन सीआरपीएफ को, जम्मू-कश्मीर में बेस्ट सीआरपीएफ बटालियन का खिताब 180 बटालियन सीआरपीएफ को दिया जाएगा। इसके अलावा बेस्ट ऑपरेशन सीआरपीएफ इन एलडब्लूई 159 बटालियन सीआरपीएफ को, बेस्ट कोस्ट इफेक्टिव आरएएफ बटालियन की ट्रॉफी 104 बटालियन, बेस्ट आरएएफ बटालियन फोर ऑपरेशन 101 बटालियन को और बेस्ट आरएएफ बटालियन फॉर एडीएम की ट्रॉफी 100 बटालियन आरएएफ को दी जाएगी।
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गीत की ये धुन बजेंगी
समारोह के दौरान देशभक्ति का माहौल होगा। परेड एंट्री के वक्त कदम कदम बढ़ाए जा गीत की धुन बजेगी। मार्च पास्ट में सारे जहां से अच्छा गीत बजेगा। सीआरपीएफ गीत ऐसा देश कभी न देखा और सोने की चिड़िया गीत की धुन भी बजेगी।
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सूचना मिलते ही बन जाती है शांति की वाहक
आरएएफ का संचालन बिना समय गंवाए के सिद्धांत पर आधारित है। सात अक्तूबर 1992 को इसकी स्थापना हुई। यह सूचना मिलते ही त्वरित गति से एक्शन में आ जाती है और शांति का वाहक बन जाती है। मौके पर तुरंत स्थिति को नियंत्रित करती है। दंगा हो या सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का अंदेशा नीले विघटनकारी पैटर्न की पोशाक में जब जवान पहुंचते हैं तो स्थिति पर नियंत्रण होने में देर नहीं लगती। देश में आरएएफ की 10 वाहिनी हैं। देश में नहीं आरएएफ ने संयुक्त राष्ट शांति मिशन हैती और लाइबेरिया में भी सेवा दी है।