मेरठ के ब्रह्मपुरी थानाक्षेत्र के मेजर ध्यानचंद नगर में जिस जगह सोमवार को भीषण आग लगी, वहां सचिन गुप्ता का फार्मावेस्ट ऑयल का धंधा धड़ल्ले से चल रहा था। सचिन गुप्ता नकली तेल के कारोबार से जुड़ा है, यह स्पष्ट हो चुका है। किस केमिकल से आग लगी, उसे लेकर उठ रहे सवालों के बीच अमर उजाला को एक सूत्र ने अलग ही जानकारी दी। जिसे लेकर प्रशासन पर भी सवाल उठना लाजिमी है। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर कैसे रिहायशी इलाके में चल रहा था ये अवैध कारोबार -
फार्मावेस्ट या काला तेल, सब नकली का खेल, ध्यानचंदनगर में हुए अग्निकांड के बाद उठ रहे कई बड़े सवाल
सूत्र के अनुसार सचिन फार्मा कंपनियों से वेस्टफार्मा ऑयल खरीदता था। अहमदाबाद से सस्ते दामों पर खरीदकर इसे बोतल में बंद कर दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खपाया जा रहा था। इस दोमंजिली मकान को गोदाम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। 10 रुपये प्रति बोतल के लालच में ज्वलनशील पदार्थ का भंडार कर लोगों की जिंदगी को दांव पर लगाया हुआ था।
यह ऑयल कंपनी की मशीनों की सफाई में प्रयोग होता है। जिसका वेस्ट एकत्र कर उसे थोक में करीब 30 रुपये प्रति लीटर सचिन खरीदता था। यह फार्मावेस्टएक तरह से तारपीन के तेल की तरह होता है, जिसे पेंट आदि में प्रयोग किया जाता है।
सचिन इसी गोदाम में इस फार्मावेस्ट का स्टॉक कर यहीं से एक-एक लीटर की बोतल में इसे 40 रुपये प्रति लीटर बेचता था। सचिन की थोक में सप्लाई दिल्ली में थी। जबकि मेरठ में भी वह इस कथित तारपीन के तेल की सप्लाई करता था। ऐसे में यह गोदाम ही उसके कारोबार का पूरा सेंटर था।
इस फार्मा वेस्ट ऑयल के बारे में एक और बात बताई गई कि यह ऑयल किसी विशेष केमिकल के संपर्क में आने पर आग भी लगा देता है। ऐसे में हो सकता है कि सचिन इस फार्मावेस्ट ऑयल के साथ कोई प्रयोग कर रहा हो और आग लग गई हो।
नकली इंजन ऑयल तो नहीं बन रहा था
ध्यानचंद नगर में जिस भवन में आग लगी थी, उसे लेकर आशंका जताई जा रही थी वहां मौजूद ड्रमों में ज्वलनशील केमिकल था, जिस कारण आग लगी। लेकिन इस आग से पहले उठने वाले धुएं को लेकर विशेषज्ञ केमिकल की जगह कोई और तेल या ज्वलनशील पदार्थ होने की आशंका जता रहे थे।
इन सभी की आशंका सही सिद्ध हुई। क्याेंकि जिस तरह करीब सात घंटे तक रुक रुक कर आग लगती रही और भवन से काला गगनचुंबी धुआं उठता रहा। उससे माना जा रहा है कि इस भवन में रखे ड्रमों में काला तेल (वाहनों में प्रयोग हो चुका इंजन ऑयल) भरा था।
गोदाम मालिक बनाता है नकली इंजन ऑयल
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार गोदाम मालिक सचिन गुप्ता के पास कोई लाइसेंस नहीं है। वह करीब डेढ़ दशक से काले तेल को रिफाइन कर उससे नकली इंजन ऑयल बनाने का काम करता था। सचिन गुप्ता का यह काला कारोबार पहले टीपीनगर थाना क्षेत्र के बेरीपुरा में था। जहां पर सचिन ने रिफाइनरी भी लगाई हुई थी।
यहां पर ब्रांडेड कंपनियों के लेवल लगाकर नकली इंजन तैयार कर बेचा जाता था। मोहल्ले वालों की शिकायत पर साल 2009 में सचिन के खिलाफ टीपीनगर पुलिस ने इस काले कारोबार को वहां से हटाया था। इसके बाद सचिन ने कई जगह अपने गोदाम बनाए।