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पुराने नोट खपाने के लिए नए हथकंडे
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 20 Nov 2016 01:46 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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काले धन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक आम आदमी पर भारी पड़ रहा है। हालत ये है कि बड़े लोग अपने यहां जमा पुराने बड़े नोटों को ठिकाने लगाने के लिए हर नया हथकंडा अपना रहे हैं। इसमें कई ने जहां काफी संख्या में मजदूरों के बैंक में खाते खुलवा दिए तो किसी ने अपने कर्मचारियों को कई माह की एडवांस में सैलरी का नगद भुगतान ही कर डाला।
पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट का चलन बाजार में बंद हो चुका है। सिर्फ सरकारी बकाये के भुगतान और पेट्रोल पंपों पर ही इनका उपयोग हो रहा है। इसके अलावा ये नोट बैंक खातों में जमा भी हो रहे हैं। लेकिन निकासी और बदलाव की गति बहुत धीमी होने से बैंकों के बाहर लाइनें लंबी लगी हैं। इन सबके बीच जिन लोगों के पास नगदी के रूप में पांच सौ और एक हजार के नोट बड़ी संख्या में इकट्ठा थे, वह अब परेशान है। क्योंकि इतनी बड़ी धनराशि बैंक से बदल नहीं सकती है और खाते में जमा होने पर आयकर विभाग की कार्रवाई निश्चित है।
इस टेंशन का तोड़ निकालने के लिए इन धनाढ्यों ने अपने तरीके से प्रयोग करने शुरू कर दिए हैं। मवाना रोड पर स्थित एक फैक्ट्री मालिक ने अपने यहां काम करने वाले श्रमिकों के बैंकों में खाते खुलवाए हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार खाते खुलवाने के बाद सभी की पासबुक और धन निकासी प्रपत्र पर हस्ताक्षर कराकर अपने पास रख लिये हैं। ऐसे में इन मजदूरों के खातों में धन जमा कराया जा रहा है। ऐसा ही एक इंस्टीट्यूट संचालक को लेकर भी चर्चा है। उसने भी कर्मचारियों के खातों को अपने कब्जे में लेकर अपना धन ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है।
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एडवांस सेलरी से कर्मचारी परेशान
शहर में कई प्राइवेट स्कूल संचालकों, कुछ प्रकाशकों और फैक्ट्री संचालकों ने अपने कर्मचारियों को एडवांस में चार से आठ माह का नगद वेतन भुगतान कर दिया है। अब ये कर्मचारी एडवांस सैलरी को बैंकों में जमा करने के लिए चक्कर काट रहे हैं। कुछ कर्मचारियों के साथ मुसीबत ये है कि उनके खातों में पहले से पर्याप्त बचत धनराशि थी। ऐसे में वह इस एडवांस सैलरी को कहां जमा करें। इस परेशानी के बीच कर्मचारी बैंक और सीए के यहां चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।
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पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट का चलन बाजार में बंद हो चुका है। सिर्फ सरकारी बकाये के भुगतान और पेट्रोल पंपों पर ही इनका उपयोग हो रहा है। इसके अलावा ये नोट बैंक खातों में जमा भी हो रहे हैं। लेकिन निकासी और बदलाव की गति बहुत धीमी होने से बैंकों के बाहर लाइनें लंबी लगी हैं। इन सबके बीच जिन लोगों के पास नगदी के रूप में पांच सौ और एक हजार के नोट बड़ी संख्या में इकट्ठा थे, वह अब परेशान है। क्योंकि इतनी बड़ी धनराशि बैंक से बदल नहीं सकती है और खाते में जमा होने पर आयकर विभाग की कार्रवाई निश्चित है।
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इस टेंशन का तोड़ निकालने के लिए इन धनाढ्यों ने अपने तरीके से प्रयोग करने शुरू कर दिए हैं। मवाना रोड पर स्थित एक फैक्ट्री मालिक ने अपने यहां काम करने वाले श्रमिकों के बैंकों में खाते खुलवाए हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार खाते खुलवाने के बाद सभी की पासबुक और धन निकासी प्रपत्र पर हस्ताक्षर कराकर अपने पास रख लिये हैं। ऐसे में इन मजदूरों के खातों में धन जमा कराया जा रहा है। ऐसा ही एक इंस्टीट्यूट संचालक को लेकर भी चर्चा है। उसने भी कर्मचारियों के खातों को अपने कब्जे में लेकर अपना धन ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है।
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एडवांस सेलरी से कर्मचारी परेशान
शहर में कई प्राइवेट स्कूल संचालकों, कुछ प्रकाशकों और फैक्ट्री संचालकों ने अपने कर्मचारियों को एडवांस में चार से आठ माह का नगद वेतन भुगतान कर दिया है। अब ये कर्मचारी एडवांस सैलरी को बैंकों में जमा करने के लिए चक्कर काट रहे हैं। कुछ कर्मचारियों के साथ मुसीबत ये है कि उनके खातों में पहले से पर्याप्त बचत धनराशि थी। ऐसे में वह इस एडवांस सैलरी को कहां जमा करें। इस परेशानी के बीच कर्मचारी बैंक और सीए के यहां चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।