धरना खत्म... किसान बोले- नहीं होने देंगे एक्सप्रेस-वे का काम, ये हैं 10 बड़ी मांगें
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मेरठ में तीन दिन से कमिश्नरी स्थित चौ. चरण सिंह पार्क में चल रहा किसानों का धरना सोमवार को खत्म हो गया, लेकिन उन्होंने एक्सप्रेस वे का काम नहीं होने की चेतावनी दी। किसानों ने धरना स्थल पर पहुंचे अपर आयुक्त उदयी राम, एसएसपी अजय साहनी, एडीएम सिटी अजय तिवारी को दस सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। अधिकारियों ने उन्हें मांगें पूरी कराने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसानों ने मांगें पूरी न होने तक मुरादाबाद गांव में अनिश्तिकालीन धरने का एलान किया है। इसके पूर्व रविवार को कमिश्नर अनीता मेश्राम से किसान कल्याण समिति के पदाधिकारियों की वार्ता हुई थी।
30 अक्तूबर से डासना से शुरू हुई पदयात्रा दो नवंबर को कमिश्नरी पहुंची थी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के रास्ते में आ रहे 19 गांवों के किसान एक समान मुआवजा न मिलने का विरोध कर रहे हैं। इसी को लेकर मोदीनगर के मुरादाबाद गांव में एक माह से धरना जारी था। धरने का नेतृत्व कर रहे सपा नेता अतुल प्रधान और रालोद के हस्तिनापुर क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह ने किसानों के बीच रहकर समस्या को अधिकारियों के सामने रखा। इस मौके पर डॉ. बबली गुर्जर, टीकन नागर, सतीश राठी, चौ. सतपाल सिंह, सुनील रोहटा, राममेहर ने भी अंतिम दिन धरने को संबोधित किया।
तीन दिन कमिश्नरी पर लटका रहा ताला
किसानों के धरने के चलते कमिश्नरी छावनी में तब्दील रही। तीन दिनों तक कमिश्नरी के मुख्य द्वार पर ताला लटका रहा। धरने के अंतिम दिन पुलिस-प्रशासन की ओर से सख्त पहरा रखा गया। इस दौरान आरआरएफ को भी कमिश्नरी पर तैनात करना पड़ा।
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सपा और रालोद के रंग में रंगा धरना
धरने के तीसरे दिन सभी समाजवादी पार्टी और रालोद की टोपी लगाकर धरने में बैठे रहे। किसानों ने लाल और हरे-सफेद रंग की टोपी लगा रखी थी। सपा की टोपी पर एक तरफ अतुल और दूसरी तरफ अखिलेश यादव लिखा था। इससे धरने में चर्चा रही कि यह धरना किसानों का नहीं बल्कि राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।
किसानों ने रागिनी में बयां किया दर्द
किसानों ने धरना समाप्ति से पूर्व अधिकारियों को रागिनी सुनाई। यह रागिनी जमीन अधिग्रहण पर आधारित थी।
अब जागो मजबूर किसानों, घनी विपत्ति आई।
आज म्हारे से जुदा हुई म्हारी प्यारी धरती माई।
आज खड़े हैं रणभूमि में पीछे हटने का नाम नहीं।
जबरन भूमि अधिग्रहण का होने देंगे काम नहीं।
शासन और प्रशासन से डरके करें सलाम नहीं।
बेशक हमें मंजूर हो आने वाली शाम नहीं।
आज म्हारे से विदा हुई म्हारी प्यारी धरती माई।
ये हैं किसानों की मांगें
1. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एक प्रोजेक्ट के लिए एक समान मुआवजा दिया जाए।
2. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर एक समान मुआवजा दिया जाए।
3. डासना से मेरठ तक किसानों के आवागमन के लिए सर्विस रोड का निर्माण।
4. टेंडर में वर्णित अंडरपास की ऊंचाई 5.5 मीटर हो। इसे छोटा कर दिया गया है।
5. मुआवजे की रकम से कृषि भूमि खरीदने पर स्टांप शुल्क खत्म हो। आयकर के अवांछित नोटिस बंद हों।
6. हाईवे की साइड में किसानों के आवागमन को रोकने वाली दीवार को हटाया जाए।
7. रेलवे कॉरीडोर के लिए अधिग्रहीत भूमि की तर्ज पर प्रभावित हर खाताधारक को साढ़े पांच लाख रुपये दें।
8. किसानों को हाईवे के प्रयोग पर टोल टैक्स फ्री हो। प्रभावित किसानों के नौजवानों को रोजगार दिए जाएं।
9. सदर तहसील के गांव कांशी, सौलाना, अच्छरौंडा, भूडबराल, परतापुर सहित अन्य गांवों की आर्बिटेशन की सुनवाई नहीं हुई।
10. मुआवजे में बड़े स्तर पर अनियमितता, घोटाला, फर्जीवाड़े की शिकायतें आने पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
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