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प्रॉपर्टी मंदी, योजनाएं फ्लॉप और रजिस्ट्री धड़ाम
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 09 Apr 2016 01:54 AM IST
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मेरठ में बहुमंजिला भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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स्टांप एवं निबंधन विभाग इस समय दोहरी मार झेल रहा है। हर साल उसका राजस्व वसूली लक्ष्य बढ़ रहा है, जबकि उसे प्राप्त करने का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। इसके पीछे मेरठ में प्रॉपर्टी की मंदी और विकास योजनाओं के मामले में फिसड्डी होना कारण है।
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मेरठ में छह उप निबंधन कार्यालय हैं। जिनमें से चार मेरठ शहर में और एक-एक सरधना और मवाना तहसील में है। इन सभी रजिस्ट्री विभाग को हर साल शासन से निबंधन एवं स्टांप शुल्क का लक्ष्य जारी होता है। वर्ष 2012-13 में 361.90 करोड़ का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जिसके सापेक्ष मेरठ के निबंधन विभाग ने 384.73 करोड़ रुपये की प्राप्ति करते हुए लक्ष्य से छह प्रतिशत ज्यादा राजस्व प्राप्त किया।
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लेकिन इसके बाद शासन से हर साल लक्ष्य बढ़ता रहा, लेकिन उसे प्राप्त करने की दर गिरती रही। 2015-16 में लक्ष्य बढ़कर 569.20 करोड़ रुपये हुआ, तो प्राप्ति मात्र 371.64 रह गई, जो लक्ष्य का 65 प्रतिशत बैठती है।
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प्रॉपर्टी में नहीं रही रुचि
मेरठ में प्रॉपर्टी का धंधा चार साल से मंदा पड़ा है। इसका बड़ा कारण ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में आयी नयी विकास एवं आवासीय योजनाएं हैं। निवेशकों ने मेरठ के बजाय नोएडा और गाजियाबाद में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। इस कारण मेरठ में शुरू हुई तमाम आवासीय योजनाएं थम गईं, वहीं प्रॉपर्टी के दाम स्थिर हो गए।
विकास योजनाएं भी नहीं चढ़ीं परवान
मेरठ में विकास योजनाएं पिछले चार साल में परवान नहीं चढ़ पाईं। एयरपोर्ट, मेट्रो, रेपिड ट्रेन, मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे जैसी तमाम विकास योजनाएं पूरा होना तो दूर, शुरू भी नहीं हो सकी हैं। मेरठ में स्थानीय स्तर पर भी इनर रिंग रोड जैसी योजना अधर में है। ऐसे में मेरठ के विकास में पिछड़ने से प्रॉपर्टी के प्रति रुझान कम होना ही था।
एमडीए के विवाद भी बड़ा कारण
एमडीए की तमाम आवासीय योजनाएं विवादों में फंसी हैं। यदि उनका ही निस्तारण हो गया होता तो निबंधन विभाग को स्टांप और निबंधन के रूप में करोड़ों रुपये प्राप्त होते। लेकिन तमाम योजनाएं विवादों की भेंट चढ़ी हुई हैं।