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बाढ़ बचाओ में बह गए करोड़ों, समस्या जस की तस

Mon, 12 Aug 2019 01:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2019 01:54 AM IST
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problem of flood continue in Hastinapur
सरकार बचाओ कार्य पर खर्च कर देती है मोटी रकम पर नहीं बनाए गए तटबंध
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रविन्द्र चौहान
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में गंगा तबाही का पैगाम लेकर आती है। जिसमें वह किसानों के खून पसीने से तैयार की गई हजारों हेक्टेयर धान और गन्ने की फसल को नष्ट कर चली जाती है। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो जाती है। साल दर साल यही सिलसिला खादर क्षेत्र के किसानों के लिए सिरदर्द बन चुका है। वे लंबे समय से गंगा के तटबंध को पक्का करने की मांग करते आ रहे हैं। इसके बावजूद शासन एवं प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया है।
खादर क्षेत्र में बरसात के दिनों में बाढ़ के चलते हजारों घर हर साल उजड़ते और बसते हैं। यहां करीब एक लाख की आबादी गंगा किनारे बसी है। इसमें आधा दर्जन से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लगभग दो दर्जन गांव हैं। यहां के लोगों की मुख्य समस्या गंगा किनारे पक्के बांध नहीं बनाए जाने से है। हर चुनाव में इस मुद्दे को उठाया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद कोई पार्टी इस ओर रुख नहीं करती। गंगा के कटान को रोकने के लिए पक्के तटबंध का निर्माण नहीं किया जा रहा है। बरसात के मौसम में प्रतिवर्ष बाढ़ से बचाव के नाम पर लाखों रुपये बहा दिए जाते हैं। यदि अब तक इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जितना पैसा बाढ़ से बचाव कार्यों पर सरकार ने खर्च किया है उतने से पक्के तटबंध की सौगात क्षेत्र के लोगों को आसानी से मिल सकती थी। प्रतिवर्ष हजारों हेक्टेयर नष्ट हो रही फसल को भी बचाया जा सकता था। जिससे क्षेत्रीय किसानों के साथ-साथ सरकार की भी आमदनी को बढ़ाया जा सकता था।
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बरसात के मौसम में गंगा में कटान जोरों पर होता है। जिस कारण अभी तक गंगा किनारे बसे कई गांव के ग्रामीण बेघर हो चुके हैं। उन्हें बसाना तो दूर उन्हें नष्ट हुई फसलों का मुआवजा तक नहीं दिया जाता है। बाढ़ खत्म होते ही ये बेचारे फिर यहीं आकर बस जाते हैं। बारिश का मौसम आने पर इलाके के लोगों की धड़कने तेज हो जाती हैं। वे पलायन के लिए बोरिया बिस्तर संभालने लगते हैं। शासन-प्रशासन यदि चाहे तो गंगा पर पक्के तटबंध की सौगात देकर इनका दर्द कम कर सकता है।
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