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मेरठ में किसान महापंचायत : प्रियंका गांधी का हमला, अंग्रेजों की तरह किसानों का शोषण कर रही भाजपा सरकार

Sun, 07 Mar 2021 01:49 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 07 Mar 2021 01:49 PM IST
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Priyanka Gandhi Kisan Mahapanchayat in Meerut today
किसान महापंचायत में मंच से बोलतीं प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला

किसान और सरकार के बीच जारी तपिश के चलते कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी आज चौथी बार पश्चिम के रण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंची। उन्होंने यहां मंच से भाजपा पर जमकर हमला बोला। कहा कि अंग्रेजों की ही तरह बीजेपी सरकार किसानों का शोषण कर रही है।

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रविवार दोपहर ढाई बजे सरधना विधानसभा के कैली गांव में आयोजित किसान महापंचायत में प्रियंका गांधी किसानों के मन को टटोलने पहुंचीं, जहां उन्होंने क्षेत्र की जनता से कांग्रेस को मजबूत करने के लिए आशीर्वाद मांगा। मेरठ पहुंचने के दौरान रास्ते में दर्जनों स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस महासचिव का स्वागत किया।
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प्रियंका गांधी ट्रैक्टर में सवार होकर मंचस्थल तक पहुंची और क्षेत्र की जनता का अभिवादन किया। उन्होंने मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेरठ की धरती है। यहीं से स्वतंत्रता संग्राम का पहला विद्रोह शुरू हुआ। उस आजादी की लड़ाई में किसान शामिल रहे। हजारों किसान आंदोलन में जुटे। बहुत लोग शहीद हुए।
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अंग्रेजी साम्राज्य किसानों को परेशान कर रहा था। भाजपा की सरकार भी किसानों का शोषण कर रही है। ऐसे कानून हैं जिससे आपकी कमाई ठीक से नही मिल पाएगी। ये कृषि कानून बड़े उद्योगपतियों को लाभ देगा। तीनों कृषि कानून में खरबपति और दूसरी तरफ आप, तो आपको क्या लाभ मिलेगा?

Priyanka Gandhi Kisan Mahapanchayat in Meerut today
प्रियंका गांधी का स्वागत करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि इन कानूनों को बनाने से पहले किसी किसान से नहीं पूछा गया। आज सौ दिन पूरे हो  गए। किसान दिल्ली बॉर्डर पर क्यों बैठे हैं, अगर कानून आप लोगो के लिए बने हैं। किसानों ने इस देश को आजादी दिलाई। किसान में हिम्मत की कमी नहीं। आत्मशक्ति की कमी नहीं है। अगर किसान बॉर्डर पर बैठा है, तो क्या प्रधानमंत्री को उसका आदर नही करना चाहिए। पानी काटा गया, बिजली काटी गई?

कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान, चीन घूमकर आए लेकिन अपने यहां ही नही जा रहे। उनकी सरकार बड़े बड़े  उद्योगपतियों के लिए चल रही है। उनके केवल दो ही मित्र हैं। बिजली के दाम बढ़ गए, पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ गया। हर तरफ से आप पर वार है। इस स्थिति को बदलने के लिए खड़े रहना पड़ेगा। आपकी जो परिस्थिति सरकार ने बनाई है। यही परिस्थिति आपको सरकार की बनानी है।



आपके गन्ने का बकाया नही हवाई जहाज खरीदे
प्रियंका गांधी ने मंच से कहा कि उत्तर प्रदेश का बकाया 10 हजार करोड़ है। मोदी जी ने दो हवाई जहाज खरीदे है। 16 हजार करोड़ में हवाई जहाज खरीदे हैं। पूरे देश का बकाया 15 हजार करोड़ है। संसद के सौंदर्यीकरण के लिए 20 हजार करोड़ रखे हैं। आपके बीमे से 26 हजार करोड़ गए उनके दोस्तों की जेब में।

उन्होंने किसानों से कहा कि आपने कई वर्षो से जुल्म सह लिए है। 215 किसान शहीद हुए। सरकार का एक भी सांसद संसद में खड़ा नही हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने आपका मजाक उड़ाया। किसान को परिजीवी कहा। आपको समझना पड़ेगा कि आपके पक्ष में है या हित में है। अब समय आ गया है आप जाग जाएं। अंत मे प्रियंका गांधी ने किसानों के शहीद होने पर दो मिनट का मौन रखवाया।

महापंचायत में उम्मीद से कम दिखी भीड़
किसान महापंचायत में प्रियंका के कद को देखते हुए भीड़ जुटाना कांग्रेसियों के लिए बड़ी चुनौती बना रहा है। हालांकि महापंचायत में उम्मीद से कम ही भीड़ नजर आई। दरअसल, जिस क्षेत्र में कांग्रेस ने यह जनसभा रखी है, वहां किसान आंदोलन का कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है।

गांव कैली ठाकुर चौबीसी में आता है। इसके पास सिर्फ रुहांसा और सकौती गांव ऐसे हैं, जहां मुस्लिम और जाट बिरादरी के लोग हैं। बाकी गांव ठाकुर और गुर्जर बिरादरी के हैं। इस क्षेत्र में अभी तक भी किसान आंदोलन का कोई असर नजर नहीं आया है। इसे दबी जुबान से कांग्रेसी भी स्वीकार कर रहे हैं। महापंचायत स्थल की बात करें तो दोपहर तक भी किसान महापंचायत में किसानों की भीड़ नहीं जुट सकी।

यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर: मंत्री संजीव बालियान बोले, एक भी किसान की जमीन गई तो दे दूंगा त्यागपत्र

कांग्रेस प्रवक्ता हरिकिशन आंबेडकर के अनुसार पचास हजार से ज्यादा भीड़ का लक्ष्य रखा गया था। महापंचायत कैली गांव में रखने के पीछे यहां दूसरे जनपदों से आने वाली भीड़ भी है। महापंचायत में शामली और मुजफ्फरनगर के साथ ही हस्तिनापुर विधानसभा से काफी संख्या में किसानों के पहुंचने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन तय संख्या से कम ही लोग पंचायत में शामिल हुए।

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