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Meerut News: प्रेमचंद आज भी समाज की सशक्त आवाज हैं
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मेरठ कॉलेज में प्रेमचंद एक साझी विरासत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
मेरठ। मेरठ कॉलेज के हिंदी एवं उर्दू विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को डॉ. रामकुमार गुप्ता सभागार में प्रेमचंद एक साझी विरासत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता सीसीएसयू के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद केवल हिंदी या उर्दू के लेखक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की साझी चेतना के महान साहित्यकार हैं।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि ईश्वर चंद गंभीर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं समाज में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देती हैं। मुख्य वक्ता प्रो. ललिता यादव ने प्रेमचंद के साहित्य के लिए संघर्षों के प्रभावशाली चित्रण पर प्रकाश डाला। डॉ. आरती राणा ने भी विचार रखे।
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द्वितीय सत्र में हिंदी एवं उर्दू विभाग के शोधार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य के विभिन्न आयामों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कविता त्यागी, डॉ. यशिका सागर और डॉ. मुकेश सेमवाल ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिनेश कुमार ने दिया। संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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मेरठ। मेरठ कॉलेज के हिंदी एवं उर्दू विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को डॉ. रामकुमार गुप्ता सभागार में प्रेमचंद एक साझी विरासत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता सीसीएसयू के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद केवल हिंदी या उर्दू के लेखक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की साझी चेतना के महान साहित्यकार हैं।
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विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि ईश्वर चंद गंभीर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं समाज में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देती हैं। मुख्य वक्ता प्रो. ललिता यादव ने प्रेमचंद के साहित्य के लिए संघर्षों के प्रभावशाली चित्रण पर प्रकाश डाला। डॉ. आरती राणा ने भी विचार रखे।
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द्वितीय सत्र में हिंदी एवं उर्दू विभाग के शोधार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य के विभिन्न आयामों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कविता त्यागी, डॉ. यशिका सागर और डॉ. मुकेश सेमवाल ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिनेश कुमार ने दिया। संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।