{"_id":"6ad8bd0f265399e58001735a","slug":"preeti-pal-also-won-a-silver-medal-in-the-100-meter-race-meerut-news-c-72-1-mct1009-161429-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: प्रीति पाल ने 100 मीटर दौड़ में भी जीता रजत पदक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: प्रीति पाल ने 100 मीटर दौड़ में भी जीता रजत पदक
Wed, 21 Oct 2026 07:09 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 21 Oct 2026 07:09 PM IST
विज्ञापन
100 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने वाली प्रीति पाल
मंगलवार को 200 मीटर दौड़ में जीता था रजत पदक, पैरालंपिक गेम्स में भी जीते दो पदक
- मुजफ्फरनगर से लेकर मेरठ तक मना जश्न
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ की पैरा एथलीट प्रीतिपाल ने बुधवार को भी जापान में चल रहे पैरा एशियन गेम्स में कमाल का प्रदर्शन किया। उन्होंने 100 मीटर दौड़ को 13.98 सेकंड में पूरा कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। देश के लिए इन खेलों में उन्होंने दूसरा रजत पदक जीता। उनकी कामयाबी से मेरठ और मुजफ्फरनगर सभी जगह खुशी मनाई गई।
प्रीतिपाल ने मंगलवार को 200 मीटर दौड़ में 29.53 सेकंड का शानदार समय निकालते हुए रजत पदक जीता था। बुधवार को उन्होंने 100 मीटर दौड़ में 13.98 का समय निकालकर रजत पदक जीता। पूर्व में प्रीतिपाल ने पैरालंपिक 2024 के खेलों में दोनों इवेंट में कांस्य पदक जीते थे। इस प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन में काफी सुधार आया है। इससे पूर्व में हुए पैरा एशियन गेम्स में वह कोई पदक नहीं जीत सकी थी।
हाशिमपुर और गंगानगर में मनाई खुशी
उनके दोनों दिन लगातार दो पदक प्राप्त करने के बाद उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है। उनके पिता ने मुजफ्फरनगर स्थित हाशिमपुर गांव में मिठाई बांटी। वहीं गंगानगर में दादा ऋषिपाल और बहन नेहा ने मिठाई बांटी। उन्होंने यहां पटाखे चलाकर खुशी मनाई।
विज्ञापन
रोजाना 6 घंटे तक किया अभ्यास
प्रीति ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। पिछले पांच सालों से वह दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रहकर कोच गजेंद्र से प्रशिक्षण ले रही हैं। गजेंद्र उनके अलावा सिमरन शर्मा को भी प्रशिक्षण दे रहे थे। उन्होंने भी इन खेलों में दोनों इवेंट में स्वर्ण पदक जीता है। प्रीति ने पैरालंपिक 2024 से पहले ही कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी। प्रतिदिन दिन में 5 से 6 घंटे अभ्यास। सुबह जल्दी उठना और रात में जल्दी सोना आदत में शुमार हो गया था। इसके बाद कड़ी ट्रेनिंग भी इस अभ्यास का हिस्सा रही। प्रीति ने बताया कि ओलंपिक में दोनों इवेंट में कांस्य पदक मिला था। इसके बाद उन्होंने पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक लाने के लिए तैयारी की थी। इसके लिए खुद को मानसिक, शारीरिक रूप से तैयार किया। इसी का नतीजा है कि वह दो पदक लेकर आईं।
ट्रैक सही होता तो स्वर्ण पदक लाती
प्रीति ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि जापान का माहौल काफी अलग है। यदि यह प्रतियोगिता जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में होती तो वह दोनों इवेंट में स्वर्ण पदक जीतती। उन्होंने कहा कि ट्रैक भी सही नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे पैर पकड़ रहा हो। यहां टाइमिंग कुछ ठीक नहीं रही। पिछले कई दिनों से वह यहां दाल और चावल खाकर ही समय काट रही थी। अब उन्हें दो पदक मिल गए हैं जिससे वह काफी खुश हैं।
पैरालंपिक 2024 में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में दोनों इवेंट में पदक
वर्ष 2021 से लगातार नेशनल में स्वर्ण पदक
बंगलूरू में हुई ओपन नेशनल में 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण
जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक
गोवा में हुए नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक
पैरा एशियन गेम्स 2022 में चौथा स्थान
विज्ञापन
- मुजफ्फरनगर से लेकर मेरठ तक मना जश्न
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ की पैरा एथलीट प्रीतिपाल ने बुधवार को भी जापान में चल रहे पैरा एशियन गेम्स में कमाल का प्रदर्शन किया। उन्होंने 100 मीटर दौड़ को 13.98 सेकंड में पूरा कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। देश के लिए इन खेलों में उन्होंने दूसरा रजत पदक जीता। उनकी कामयाबी से मेरठ और मुजफ्फरनगर सभी जगह खुशी मनाई गई।
प्रीतिपाल ने मंगलवार को 200 मीटर दौड़ में 29.53 सेकंड का शानदार समय निकालते हुए रजत पदक जीता था। बुधवार को उन्होंने 100 मीटर दौड़ में 13.98 का समय निकालकर रजत पदक जीता। पूर्व में प्रीतिपाल ने पैरालंपिक 2024 के खेलों में दोनों इवेंट में कांस्य पदक जीते थे। इस प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन में काफी सुधार आया है। इससे पूर्व में हुए पैरा एशियन गेम्स में वह कोई पदक नहीं जीत सकी थी।
विज्ञापन
हाशिमपुर और गंगानगर में मनाई खुशी
उनके दोनों दिन लगातार दो पदक प्राप्त करने के बाद उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है। उनके पिता ने मुजफ्फरनगर स्थित हाशिमपुर गांव में मिठाई बांटी। वहीं गंगानगर में दादा ऋषिपाल और बहन नेहा ने मिठाई बांटी। उन्होंने यहां पटाखे चलाकर खुशी मनाई।
विज्ञापन
रोजाना 6 घंटे तक किया अभ्यास
प्रीति ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। पिछले पांच सालों से वह दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रहकर कोच गजेंद्र से प्रशिक्षण ले रही हैं। गजेंद्र उनके अलावा सिमरन शर्मा को भी प्रशिक्षण दे रहे थे। उन्होंने भी इन खेलों में दोनों इवेंट में स्वर्ण पदक जीता है। प्रीति ने पैरालंपिक 2024 से पहले ही कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी। प्रतिदिन दिन में 5 से 6 घंटे अभ्यास। सुबह जल्दी उठना और रात में जल्दी सोना आदत में शुमार हो गया था। इसके बाद कड़ी ट्रेनिंग भी इस अभ्यास का हिस्सा रही। प्रीति ने बताया कि ओलंपिक में दोनों इवेंट में कांस्य पदक मिला था। इसके बाद उन्होंने पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक लाने के लिए तैयारी की थी। इसके लिए खुद को मानसिक, शारीरिक रूप से तैयार किया। इसी का नतीजा है कि वह दो पदक लेकर आईं।
ट्रैक सही होता तो स्वर्ण पदक लाती
प्रीति ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि जापान का माहौल काफी अलग है। यदि यह प्रतियोगिता जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में होती तो वह दोनों इवेंट में स्वर्ण पदक जीतती। उन्होंने कहा कि ट्रैक भी सही नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे पैर पकड़ रहा हो। यहां टाइमिंग कुछ ठीक नहीं रही। पिछले कई दिनों से वह यहां दाल और चावल खाकर ही समय काट रही थी। अब उन्हें दो पदक मिल गए हैं जिससे वह काफी खुश हैं।
पैरालंपिक 2024 में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में दोनों इवेंट में पदक
वर्ष 2021 से लगातार नेशनल में स्वर्ण पदक
बंगलूरू में हुई ओपन नेशनल में 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण
जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक
गोवा में हुए नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक
पैरा एशियन गेम्स 2022 में चौथा स्थान