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मेरठ के 40 अस्पतालों के आवेदन निरस्त, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मानकों पर नहीं उतरे खरे

Sun, 15 Dec 2019 04:06 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 15 Dec 2019 04:06 PM IST
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Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana, forty hospitals  out from the list in Meerut
आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला

मेरठ जिले के अस्पताल आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इस योजना के तहत आवेदन करने वाले 40 अस्पतालों-नर्सिंग होम के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।

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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान योजना में जनपद के 102 अस्पतालों-नर्सिंग होम ने आवेदन किए थे। इनकी जांच की गई, जिसमें से 40 अस्पताल ऐसे निकले, जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे। स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें मानक पूरे करने के लिए कहा है, ताकि इन्हें फिर से आवेदन का मौका दिया जा सके।

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इनमें कई नामी अस्पताल भी शामिल हैं। सिर्फ 62 अस्पताल ऐसे थे, जो मानकों को पूरा कर रहे हैं, इनमें से भी तीन अस्पताल जांच में फेल निकले हैं। दो पर निरस्तीकरण की तलवार लटकी है, एक बहाल हो सकता है।
इस तरह आयुष्मान के तहत सिर्फ 60 अस्पताल ही रह जाएंगे। इनमें छह सरकारी हैं और बाकी निजी अस्पताल हैं।

दूसरी तरफ, स्वास्थ्य विभाग में 243 अस्पताल-नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जिनमें से 141 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने इस योजना में शामिल होना ही मुनासिब नहीं समझा है। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें शामिल करने की कोशिश की, मगर उन्होंने इसमें शामिल होने से इंकार कर दिया। जबकि जिन्होंने आवेदन किया, उनमें से 40 प्रतिशत मानकों पर खरे ही नहीं उतरे। यह हालात तब हैं, जबकि मेरठ को मेडिकल का हब कहा जाता है। 

यह है प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार चिह्नित हैं। इनमें 89 हजार 109 परिवार देहात और एक लाख 22 हजार 307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है।

इस योजना के तहत 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। इसमें 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठा रही है। मेरठ में आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी।

जांच में निकले फेल
स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करती है। परखती है कि आयुष्मान में पंजीकृत अस्पतालों में जो जांच, सर्जरी और इलाज शामिल है, वह है या नहीं। अगर कहीं ये सुविधाएं नहीं होती हैं तो उसके आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। अभी तक 40 अस्पतालों के आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। - डॉ. पूजा शर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी

दो अस्पतालों ने नाम लिया वापस

आयुष्मान भारत के तहत जन आरोग्य योजना शुरू हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अभी पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पाई है। अभी भी 86 हजार 504 लाभार्थी परिवार ऐसे हैं, जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बने है। इसमें शामिल दृष्टि अस्पताल और सर्वोदय अस्पताल ने अपना नाम वापस ले लिया है। इनका तर्क यह है कि जो खर्च इलाज में आ रहा है, आयुष्मान योजना में भुगतान उससे काफी कम किया जाता है।

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