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मेरठ-गढ हाईवे पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए बने मुसीबत
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हाईवें 709ए पर बने गहरे गढढें। स्त्रोत:- संवाद
कार्यदायी संस्था और एनएचएआई की आपसी भिड़ंत में राहगीरों को भुगतनी पड़ रही रही परेशानी
माछरा। मेरठ-गढ़ हाईवे (709ए) का चौड़ीकरण अब आने जाने वाले लोगों के लिए जानलेवा बन चुका है। बारिश के कारण हाईवे पर करीब डेढ़ फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं।
हाईवे का गांव सिसौली से लेकर गढमुक्तेश्वर के गांव बदरखा तक निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए टाटा कंपनी को ठेका दिया गया था। निर्माणकर्ता द्वारा 10 अक्तूबर 2021 से 10 अक्तूबर 2023 तक काम पूरा करना था। 47 किलोमीटर लंबे हाईवे का निर्माण करीब 955 करोड़ रुपये की लागत से होना था। परियोजना की समीक्षा में पाया गया कि काफी धनराशि खर्च करने के बावजूद 48 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो सका है। कार्य पूरा नहीं होने के कारण दिसंबर 2024 को एनएचएआई ने टाटा कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया। टाटा कंपनी इस आदेश के विरुद्ध न्यायालय की शरण में चली गई। तभी से हाईवे का कार्य बंद पड़ा है। बारिश के कारण हाईवे की हालत बद से बदतर हो चुकी है।
बारिश के बाद हो रहे सड़क पर हादसे
हाईवे का निर्माण नहीं होने और कार्य बीच में ही अटकने के कारण मेरठ से गढ़मुक्तेश्वर तक कई स्थानों पर सड़क को एक लेन से दूसरी लेन में डायवर्ट किया गया है। मेरठ-गढ़ मार्ग के बीच किठौर, सिसौली, माछरा, हसनपुर कलां, नंगली किठौर के पास हाईवे की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इस रोड पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं और गड्ढों में पानी भर जाता है। इससे गड्ढों की गहराई का वाहन चालक अंदाजा नहीं लगा पाते हैं और वाहन का पहिया गड्ढों में गिरने से क्षतिग्रस्त हो जाता है। वाहन चालक गिरकर चोटिल भी हो रहे हैं। वाहन चालक परवेज, रिंकू, बलराज त्यागी, मुमताज आलम, सुबोध कुमार आदि का कहना है कि आए दिन लोगों को गंभीर चोटें लग रही हैं।
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बयान....
एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मेरठ-गढ़ हाईवे पर हो रहे निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण कार्यदायी संस्था का अनुबंध निरस्त कर दिया गया है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। दूसरा टेंडर जारी करने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इन स्थानों पर गड्ढे अधिक बड़े हैं। उन्हें शीघ्र ही भरवाया जाएगा।
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माछरा। मेरठ-गढ़ हाईवे (709ए) का चौड़ीकरण अब आने जाने वाले लोगों के लिए जानलेवा बन चुका है। बारिश के कारण हाईवे पर करीब डेढ़ फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं।
हाईवे का गांव सिसौली से लेकर गढमुक्तेश्वर के गांव बदरखा तक निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए टाटा कंपनी को ठेका दिया गया था। निर्माणकर्ता द्वारा 10 अक्तूबर 2021 से 10 अक्तूबर 2023 तक काम पूरा करना था। 47 किलोमीटर लंबे हाईवे का निर्माण करीब 955 करोड़ रुपये की लागत से होना था। परियोजना की समीक्षा में पाया गया कि काफी धनराशि खर्च करने के बावजूद 48 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो सका है। कार्य पूरा नहीं होने के कारण दिसंबर 2024 को एनएचएआई ने टाटा कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया। टाटा कंपनी इस आदेश के विरुद्ध न्यायालय की शरण में चली गई। तभी से हाईवे का कार्य बंद पड़ा है। बारिश के कारण हाईवे की हालत बद से बदतर हो चुकी है।
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बारिश के बाद हो रहे सड़क पर हादसे
हाईवे का निर्माण नहीं होने और कार्य बीच में ही अटकने के कारण मेरठ से गढ़मुक्तेश्वर तक कई स्थानों पर सड़क को एक लेन से दूसरी लेन में डायवर्ट किया गया है। मेरठ-गढ़ मार्ग के बीच किठौर, सिसौली, माछरा, हसनपुर कलां, नंगली किठौर के पास हाईवे की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इस रोड पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं और गड्ढों में पानी भर जाता है। इससे गड्ढों की गहराई का वाहन चालक अंदाजा नहीं लगा पाते हैं और वाहन का पहिया गड्ढों में गिरने से क्षतिग्रस्त हो जाता है। वाहन चालक गिरकर चोटिल भी हो रहे हैं। वाहन चालक परवेज, रिंकू, बलराज त्यागी, मुमताज आलम, सुबोध कुमार आदि का कहना है कि आए दिन लोगों को गंभीर चोटें लग रही हैं।
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एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मेरठ-गढ़ हाईवे पर हो रहे निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण कार्यदायी संस्था का अनुबंध निरस्त कर दिया गया है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। दूसरा टेंडर जारी करने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इन स्थानों पर गड्ढे अधिक बड़े हैं। उन्हें शीघ्र ही भरवाया जाएगा।