मेरठ मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम हाउस के फ्रीजर डेड, शवों की दुर्गति, दुर्गंध से हलकान
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मेडिकल कॉलेज परिसर में पोस्टमार्टम हाउस स्थित है। वेस्ट यूपी के अन्य जिलों के सरकारी कर्मचारी, जेल के बंदी की मौत, आत्महत्या, हत्या, दहेज हत्या एवं दुर्घटना के मामलों में पोस्टमार्टम यहीं किया जाता है। यहां एक साल में करीब डेढ़ हजार शवों के पोस्टमार्टम किए जाते हैं। इसके लिए जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी से चिकित्सकों की रोस्टर अनुसार ड्यूटी लगाई जाती है।
पोस्टमार्टम हाउस मेें छह फ्रीजर हैं। एक फ्रीजर में एक बार में एक ही शव रखा जाता है। शव को फ्रीजर में रखने के बाद दुर्गंध नहीं आती और उसकी दुर्गति भी नहीं होती है।
फ्रीजर खराब होने से पोस्टमार्टम हाउस के कमरे में रखे शवों का ऐसा हाल है कि उसमें जाने की हिम्मत नहीं हो रही। गर्मी के चलते दुर्गंध आ रही है। वे 12 घंटे में ही फूलने लगते हैं। इस साल एक जनवरी से 20 जून तक करीब 660 शवों का पोस्टमार्टम किया गया है।
लावारिस शव 72 घंटे तक
जिले में लावारिस शव मिलता है तो पुलिस उसे मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर रखवा देती है। पुलिस शव की शनाख्त करने का प्रयास करती है। इसके लिए शव मिलने के 72 घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस पर रहता है। पहचान नहीं होने पर चिकित्सक पोस्टमार्टम करते हैं। इसके बाद पुलिस अंतिम संस्कार करा देती है।
शवों की दुर्गंध से हलकान
पोस्टमार्टम हाउस पर शनिवार को 10 शवों का पोस्टमार्टम किया गया। लावारिस शव भी मोर्चरी में रखे हुए थे। इसके चलते यहां कई बार 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुट जाती है। ऐसे में दुर्गंध आने के चलते लोगों का ठहरना दुश्वार हो जाता है। पूर्व में कई बार यहां महिला सिपाही भी बेहोश होकर गिर चुकी हैं।