EXCLUSIVE: यूपी के इस शहर में बिना आतिशबाजी के ही फूट रहा प्रदूषण का बम
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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी की समयसीमा को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती आतिशबाजी की समयसीमा और खास तरह के पटाखों के इस्तेमाल संबंधी आदेशों का क्रियान्यवन कराने की है। पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समयावधि में आतिशबाजी के आदेश धूमधड़ाके में दब गए थे। वैसे भी मेरठ में दिवाली से पहले बिना आतिशबाजी के ही प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आतिशबाजी क्रेता, विक्रेताओं को खुशी जरूर हुई लेकिन पूरी तरह प्रतिबंध न लगने से पर्यावरण प्रेमियों की चिंताएं जरूर बढ़ गई। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण विभाग का मानना है कि पटाखे बेचने के लिए दुकानदारों को कुछ शर्तों का पालन जरूर करना पड़ेगा और ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। हालांकि विभाग के पास क्रियान्वयन के लिए कोई पैमाना नहीं है। पैमाना है तो बस प्रदूषण को नापने का, जिसमें मेरठ पहले ही गंभीर चुनौती झेल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे चलाने के आदेश दिए हैं, लेकिन इसे लागू कराने की कोई व्यवहारिक कार्ययोजना फिलहाल नजर नहीं आ रही है। दिवाली पर शाम से ही पटाखे चलाने का दौर शुरू हो जाता है, जो देर रात तक जारी रहता है। पिछले साल ही रात में दस बजे से सुबह छह बजे तक के लिए आतिशबाजी बैन की गई थी, लेकिन ये आदेश आतिशबाजी के शोर में गुम हो गए थे।
प्रदूषण से बचने के लिए लेागों को सहयोग करना चाहिए, नियमनुसार ही पटाखे छोड़ने चाहिए। दिवाली पर इसकी तीन बार मॉनीटरिंग की जाएगी। इसकी रिपोर्ट बोर्ड मुख्यालय को भी दी जाएगी। - आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
वर्तमान में ध्वनि प्रदूषण का हाल
- बेगमपुल 70.0
- रेलवे रोड 65.2
- थापरनगर 62.6
- शास्त्रीनगर 60.0
- पल्लवपुरम 58.6
- कैंट अस्पताल 61.4
ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में है, जिसका सामान्य मानक 40 से 50 होना चाहिए यानी शहर में आम दिनों में ही ध्वनि प्रदूषण मानक से ऊपर है, जबकि दिवाली तक यह और भी बढ़ जाता है। दिवाली पर बेगमपुल पर ध्वनि प्रदूषण 80 से ऊपर पहुंच जाता है। ऐसा ही हाल, थापरनगर, शास्त्रीनगर और अन्य क्षेत्रों का भी है।
ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने पर दें जोर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग का मानना है कि शांत क्षेत्रों में भी पटाखों का शोर और धुआं दोनों बढ़ रहे हैं जो चिंता का विषय है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने पर जोर देना चाहिए और इसके लिए पहले से कार्ययोजना बने और जागरूकता पैदा की जाए। लेकिन पर्व उल्लास में पर्यावरण संरक्षण के प्रति लापरवाही नहीं रुकती है।
ऐसे होगी मॉनीटरिंग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिवाली पर शहर में अलग अलग हिस्सों को मॉनीटरिंग करता है। शहर में आवासीय क्षेत्र, कॉमर्शियल क्षेत्र और अंति संवेदनशील क्षेत्र के लिए अलग अलग प्वाइंट बनाकर मॉनीटरिंग की जाती है। दिवाली से एक सप्ताह पहले, दिवाली वाले दिन और फिर दिवाली से अगले दिन, तीन बार मॉनीटरिंग होती है। इससे पता चलता है कि सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण किस क्षेत्र में हुआ है।
अभी से हो रही बिक्री
चौबीस घंटे पहले ही मवाना क्षेत्र के सठला गांव में लाखों रुपये कीमत के पटाखे पकड़े गए हैं। पटाखों की बिक्री दशहरे से शुरु हो जाती है और जो दिवाली तक चलती है। अभी से ही पटाखों की बिक्री शुरू होने के साथ साथ छोटे दुकानदारों ने अपना स्टाक भी लगाना शुरू कर दिया है।
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