सांस लेने लायक नहीं है बागपत की हवा, मुश्किल में बच्चे, डीएम ने शुरू की ये पहल
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दिल्ली और हरियाणा से सटे बागपत की हवा सांस लेने लायक नहीं है। रेड जोन में शामिल हो चुके जिला बागपत में पुराने वाहन, पराली और ईंट भट्टे लोगों के लिए खतरा बन गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा सबसे अधिक है। प्रदूषण होने के कारण श्वांस और अस्थमा के रोगियों को सांस लेना भी भारी होने लगा है। दीवाली पर स्मॉग फैलने से मुसीबत और अधिक बढ़ेगी। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने लोगों को जागरूक करने के लिए पहल शुरू कर दी है।
यूपी के 15 जिले प्रदूषण की जकड़ में हैं। इसमें बागपत जिला पांचवें स्थान पर है। एक्यूआई 401 रिकॉर्ड किया है। जिले की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। प्रदूषित वातावरण अस्थमा के मरीज, बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी भरा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राज सिंह ने बताते हैं कि प्रदूषित वातावरण स्वास्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देगा। बच्चों में होने वाली खांसी इसका ही परिणाम है। इसके लिए सजग रहने की जरूरत है। पिलाना सीएचसी के प्रभारी डॉ. यशवीर सिंह कहते हैं कि प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है। लोग जागरूक बनें और प्रदूषण से निपटने के लिए पहल करें।
घर से निकलते समय मुंह पर मास्क या कपड़ा पहनकर निकले। इससे प्रदूषित वातावरण में फैले वायरस शरीर में प्रवेश नहीं करेंगे। वाहन बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। इनसे निकलने वाला धुआं मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। ऐसी फैक्ट्रियों पर भी नकेल कसी जाए जो आबादी के बीच चल रही है और प्रतिबंधित हैं। ईंट भट्ठों में रबड़, टायर और प्रदूषित सामग्री जलाई जाती है इससे पर्यावरण प्रदूषित हो गया है।
हरियाणा की पराली ने खड़ी कर दी मुसीबत
वर्तमान समय में हरियाणा से धान की पराली खरीदकर ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से क्षेत्र में लाई जा रही है। गौरीपुर मोड़ होते हुए बड़ौत और इसके बाद पराली को मेरठ ले जाया जा रहा है। रात के समय जाम रहने के अलावा कई जगह इस पराली को जलाया जा चुका है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे और मेरठ-बड़ौत मार्ग के ग्रामीण पराली से परेशान हैं।
प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों की होगी जांच
दिल्ली और गाजियाबाद में प्रदूषण जांच केंद्रों पर फर्जी तरीके से जारी किए गए वाहन चालकों को प्रमाणपत्र प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिले में संचालित 24 प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों पर छापेमारी होगी। इसके लिए जल्द अभियान चलेगा। निरंतर बढ़ रही वाहनों की संख्या से वातावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रतिबंधित वाहन भी धड़ल्ले से दौड़ रहे है। जबकि बंद करने के लिए फरमान जारी हो चुके है, लेकिन असर नजर नहीं आ रहा है। प्रदूषण अनकंट्रोल होने की एक वजह प्रदूषण नियंत्रण केंद्र भी है। इनके द्वारा ऐसे वाहनों को भी सही प्रमाणपत्र दिए जाते है, जिनसे अधिक धुआं निकलता है। गाजियाबाद और दिल्ली में इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने दुकानों पर पहुंचकर अभियान चलाया तो इसका खुलासा हुआ। जिले में संचालित होने वाले 24 प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों की जांच होगी। इसके लिए उपसंभागीय परिवहन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी। एसडीएम बागपत विवेक कुमार यादव ने कहा कि शहर को प्रदूषण मुक्त बनाया जाएगा। शासन और प्रशासन के आदेशों का पालन होगा। क्षेत्र के सभी प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों की जांच कराई जाएगी। कार्रवाई के लिए एआरटीओ प्रवर्तन को लिखा जाएगा। एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने बताया कि दिल्ली और गाजियाबाद में फर्जी प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने का खुलासा हुआ। इसके बाद जिले में 24 प्रदूषण नियंत्रण केंद्र चल रहे हैं, इनकी जांच होगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं प्रतिबंधित वाहनों के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा।
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