सपा में सियासत तेज, जिलाध्यक्ष बने राजपाल सिंह के सामने बड़ी चुनौती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ में भले ही एडवोकेट राजपाल सिंह ने जिलाध्यक्ष पद पर होने वाली दौड़ में बाजी मार ली हो। लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी। न केवल विपक्ष की भूमिका का मेरठ में सही तरह से निर्वहन करना होगा बल्कि पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा। यह इतना आसान नहीं है क्योंकि मुख्य रूप से तीन धड़ों के इर्द गिर्द घूमने वाली सपाई राजनीति में बाकी दो धड़े भी अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे।
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सपा नए सिरे से संगठन खड़ा कर रही है। पार्टी इस चुनाव में सारे मोहरों को देख चुकी है। यही कारण है कि इस बार बतौर जिलाध्यक्ष के लिए सपा थिंक टैंक ने पुराने सिपहसालार पर भरोसा जताया। एडवोकेट राजपाल सिंह को पार्टी का जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया गया। हालांकि समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और सरधना से चुनाव लड़े अतुल प्रधान की दावेदारी भी बेहद मजबूत मानी जा रही थी। ओमपाल गुर्जर का भी नाम चर्चा में था, तो साथ में यह भी संभावना जताई जा रही थी कि सभी धड़ों को शांत करने के लिए फिर से जयवीर सिंह को ही रिपीट किया जा सकता है। ऐसा कुछ नहीं हुआ और पार्टी राजपाल सिंह में भरोसा जताया गया।
राजपाल सिंह के सामने यहां दो चुनौती
अहम बात यह है कि राजपाल सिंह के सामने यहां दो चुनौती हैं। विभिन्न मुद्दों पर लड़ाई लड़कर जहां मेरठ में सपा के अस्तित्व को बचाए रखना है, तो वहीं अपनों को साधने की कड़ी चुनौती भी उनके सामने हैं। कारण कि अतुल प्रधान की टीम जहां युवा है, तो वहीं मंत्री शाहिद मंजूर के नजदीकी कहे जाने वाले ओमपाल के पास भी युवा टीम है। इन्हें साधना टेढ़ी खीर साबित होगा।
जिलाध्यक्ष चुनने के साथ ही पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर को जिला संगठन प्रभारी के पद से हटा दिया गया है। पिछले दिनों ही उन्हें जिला इकाई भंग करने के बाद संगठन प्रभारी बनाया गया था। ऐसे में यहां भी नाराजगी हो सकती है। बहरहाल, जल्दी ही तस्वीर का रुख साफ हो जाएगा कि एडवोकेट राजपाल सिंह टीम को साधने में कितना सफल हो पाते हैं।