फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   political news meerut

2012 का फार्मूला लेकर मिशन-2017 पर सपा

Sat, 26 Mar 2016 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Sat, 26 Mar 2016 02:20 AM IST
विज्ञापन
political news meerut
दक्षिण विधानसभा से टिकट मिलने पर आदिल चौधरी का स्वागत करते समर्थक। - फोटो : अमर उजाला
सपा ने ज्यादातर पुराने चेहरों के सहारे मिशन-2017 के लिये बिसात बिछा दी है। हारी सीटों पर घोषित प्रत्याशियों पर नजर डालें तो नई लड़ाई के लिये फार्मूला और समीकरण भी पुराना ही आजमाने की तैयारी है। वेस्ट यूपी में पार्टी ने कुछ सीटों पर प्रत्याशी तो बदले हैं, लेकिन भरोसा पुराने चेहरों पर ही जताया है।
विज्ञापन


पश्चिम में बुलंदशहर की सिकंदराबाद सीट और बागपत के अलावा सपा के परंपरागत यादव वोटों की संख्या ज्यादा नहीं है। ऐसे में सपा ज्यादातर सीटों पर मुस्लिम या फिर स्थानीय जातिगत समीकरण के हिसाब से प्रत्याशी उतारती रही है। अहम सवाल यह है कि पिछली बार सपा की लहर में जिन सीटों को गंवा दिया गया तो उन पर अब उसी पुराने फार्मूले से जीत कैसे हासिल होगी?
विज्ञापन


माना यह भी जा रहा है कि नये और मजबूत विकल्प के अभाव में सपा ने पुराने चेहरों पर भरोसा जताया है। हालांकि, इस बार सपाई युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और विकास के सहारे जीत की दहलीत पर पहुंचने का दावा कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मेरठ जिले में पिछले चुनाव में किठौर से शाहिद मंजूर, हस्तिनापुर से प्रभुदयाल वाल्मीकि और सिवालखास से गुलाम मोहम्मद जीते थे, जबकि कैंट से अनिल बख्शी, शहर सीट से रफीक अंसारी, दक्षिण से आदिल चौधरी और सरधना सेे अतुल प्रधान चुनाव हार गए थे। नई सूची में कैंट से एक बार फिर पंजाबी समाज को तरजीह देते हुए युवा चेहरे परविंदर सिंह ईशु को टिकट दिया गया है तो दक्षिण से आदिल चौधरी, शहर से रफीक अंसारी और सरधना से अतुल प्रधान पर ही भरोसा जताया गया है। 

सहारनपुर में बेहट से प्रत्याशी बने उमर अली खान पिछली बार तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं, सहारनपुर नगर से घोषित प्रत्याशी संजय गर्ग पिछली बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर तीसरे नंबर पर ही आए थे। हाल में हुए उपचुनाव में भी सपा ने संजय गर्ग को मैदान में उतारा था। सहारनपुर देहात में जिन अब्दुल वाहिद पर सपा ने दांव लगाया है, वह पिछले बार कांग्रेस के टिकट पर दूसरे नंबर पर रहे थे। सपा ने यहां पिछली बार भी मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव में उतारा था। रामपुर मनिहारन में पिछली बार तीसरे नंबर पर रहे विश्वदयाल छोटन की जगह विमला राकेश को तो गंगोह में दूसरे नंबर पर रहे रूद्रसेन चौधरी को फिर से प्रत्याशी बनाया गया है।

थानाभवन मेें पिछली बार लगभग 10 हजार वोट पाए किरणपाल कश्यप तो शामली में पिछला चुनाव हारे पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान पर साइकिल दौड़ाने की जिम्मेदारी होगी। इनके अलावा पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे चरथावल से मुकेश चौधरी, पुरकाजी से उमा किरण और खतौली से श्यामलाल सैनी पर सपा ने इस बार फिर से दांव खेला है।

नजीबाबाद, बढ़ापुर, चांदपुर और नूरपुर में पिछली बार की तरह सपा ने मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। बागपत में मेरठ से जुड़े नेता डॉ. कुलदीप उज्ज्वल जाट समाज से हैं तो पिछली बार जाट समाज से ही साहब सिंह साइकिल के निशान पर चुनाव लड़े थे। साहब सिंह को इस बार बड़ौत से दावेदार बनाया गया है। 

मुरादनगर सीट पर पिछली बार  त्यागी-मुस्लिम समीकरण के सहारे चुनाव लड़कर राजपाल त्यागी दूसरे नंबर पर रहे थे तो इस बार इसी समीकरण के तहत दिशांत त्यागी मैदान में होंगे। साहिबाबाद में पिछली बार ब्राह्मण प्रत्याशी था तो इस बार मुस्लिम राशिद मलिक प्रत्याशी बने हैं। गाजियाबाद और मोदीनगर में पिछली बार की तरह ही ब्राह्मण प्रत्याशियों पर दांव लगाया है।

गाजियाबाद में पिछली चुनाव में हारे पवन शर्मा की जगह डॉ. सागर शर्मा तो मोदीनगर में पिछली बार तीसरे नंबर पर रहे रामआसरे शर्मा फिर से मैदान में होंगे। नोएडा और दादरी में भी पिछले समीकरणों पर ही नई लड़ाई लड़ने की तैयारी है। बुलंदशहर और सिकंदराबाद में भी ऐसी ही स्थिति है। अब देखना होगा कि इन पुराने समीकरणों के सहारे सपा मिशन-2017 में पिछली बार की हारी हुई सीटों पर कैसे परचम फहराएगी।
 

सपा ने कैंट में खेला सिख-पंजाबी कार्ड  
पिछले
चुनाव में पंजाबी कार्ड खेलने वाली सपा ने कैंट विधानसभा क्षेत्र में इस बार पंजाबी-सिख कार्ड खेला है। बसपा के जाट और सपा के पंजाबी कार्ड ने कहीं न कहीं भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। भाजपा के लिए कैंट विधानसभा में पंजाबी और जाट ही निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।

 
समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को मेरठ की सात विधानसभा सीटों में से चार पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। इनमें सरधना से अतुल प्रधान, मेरठ दक्षिण से आदिल चौधरी, मेरठ शहर से रफीक अंसारी को उतारा है। ये तीनों ही वर्ष 2012 का चुनाव सपा से लड़ चुके हैं और तीनों की हार हुई थी, लेकि न पार्टी ने फिर से इन्हीं पर भरोसा जताया है। कैंट में 2012 में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल बख्शी को मैदान में उतारा था, जबकि बसपा से सुनील वाधवा और कांग्रेस से रमेश धींगड़ा मैदान में थे। तीनों ही पार्टियों से पंजाबी बिरादरी के प्रत्याशी होने के कारण जहां पंजाबी वोटों का बंटवारा हो गया था तो भाजपा को जाट वोट मिल गए थे। जिस कारण भाजपा जीत गयी थी।

 
इस बार बसपा ने पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारकर जाट वोटों को भाजपा से छिटकाने का कार्ड चला है। वहीं, सपा ने फिर से पंजाबी-सिख पर भरोसा जताया है। सपा ने यहां से परविंदर ईशु को प्रत्याशी घोषित किया है। परविंदर का सिख बिरादरी के साथ ही पंजाबियों में असर माना जाता है। ऐसे में इस बार भाजपा की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है। 
 

सरधना में होगी तगड़ी टक्कर 
सरधना
विधानसभा से सपा ने एक बार फिर अतुल प्रधान को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में अतुल तीसरे नंबर पर रहे थे, लेकिन इस बार वह लगातार इस विधानसभा में सक्रिय हैं। हालांकि अतुल के भविष्य को लेकर अभी बसपा प्रत्याशी पर सबकी नजर है। क्योंकि यहां से बसपा ने अभी तक प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। पिछली बार बसपा से यहां से पूर्व विधायक चंद्रवीर मैदान में थे, लेकिन रालोद से मैदान में उतरे हाजी याकूब कुरैशी के कारण बसपा और सपा दोनों का समीकरण गड़बड़ा गया। याकूब के कारण जाट और मुस्लिम दोनों वोट कट गए, जिसका फायदा सीधे-सीधे भाजपा को मिला। 
 

दक्षिण और शहर में रहेगा पुराना समीकरण 
दक्षिण
और शहर विधानसभा में भी सपा ने पिछले चुनाव के प्रत्याशी दोबारा मैदान में उतारे हैं। इनमें दक्षिण से आदिल चौधरी के सामने बसपा से राशिद अखलाक, रालोद से मंजूर सैफी और भाजपा से रविंद्र भड़ाना थे। इस बार भी भाजपा का जहां किसी गुर्जर को ही यहां से मैदान में उतारना तय है तो बसपा भी किसी मुस्लिम को ही मैदान में उतारेगी। आदिल चौधरी यहां तीसरे नंबर पर रहे थे। जबकि शहर में भाजपा के डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से सपा के रफीक अंसारी चुनाव हारे थे।


 

 

जबकि कांग्रेस से उतरे यूसुफ कुरैशी दूसरे और बसपा से मैदान में उतरे सलीम अंसारी चौथे स्थान पर रहे थे। इस बार भी बसपा ने यहां कुंवर दिलशाद के रूप में मुस्लिम कार्ड खेला है। जबकि भाजपा से डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का आना तय है। दक्षिण और शहर में अब नजर कांग्रेस प्रत्याशी पर हैं। क्योंकि यहां कांग्रेस पिछले चुनाव का नतीजा देखते हुए भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed