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भाजपाइयों के निशाने पर पुलिस अफसर
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मेरठ। शास्त्रीनगर सेक्टर-8 में एक दर्जन लोगों द्वारा ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगाने के मामले में जहां पुलिस अफसरों ने कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है तो भाजपा नेताओं का कहना है कि मुकदमे वापस कराए जाएंगे। इस प्रकरण में भाजपा नेताओं ने अफसरों को घेरने की तैयारी कर ली है।
पुलिस अधिकारियों के लिए यहां कानून व्यवस्था के साथ व्यापारियों और अन्य लोगों की समस्याएं निपटाना बड़ी चुनौती रही हैं। मार्च 2016 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो पुलिस अफसर यहां व्यापारियों और भाजपाइयों को कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाने लगे। उसके बाद दो अप्रैल 2018 को हुए बवाल का ठीकरा पुलिस अफसरों पर ही फूटा। पहले प्रह्लाद नगर प्रकरण में स्थानीय लोगों ने एक वर्ग के लोगों पर मारपीट, धमकी देने, लूट और सरेआम छेड़छाड़ व गुंडागर्दी के आरोप लगाए तो शासन तक गूंज हुई, जिसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। 30 जून को बिना अनुमति के युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली ने जब फैज ए आम में भीड़ जुटाकर मीटिंग की और जबरन जुलूस निकाला तो भाजपा विधायकों ने सीधे अफसरों पर निशाना साधा। भाजपा विधायक जब कानून व्यवस्था पर बिफरे तो एसएसपी व आईजी का तबादला हुआ।
शनिवार को शास्त्रीनगर सेक्टर-8 में एक दर्जन लोगों ने मकान बिकाऊ के पोस्टर लगाए, हालांकि यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि किराना व्यापारी राकेश गुप्ता ने एक वर्ग के व्यक्ति को 23 लाख में मकान बेचने का सौदा कर दिया। पुलिस ने पोस्टर हटवाते हुए मामला शांत करा दिया। लेकिन नौचंदी थाने में हरकेश कुमार और पूर्णेंद्र शर्मा व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सेक्टर-8 के लोगों ने रविवार को भाजपा विधायक सोमेंद्र तोमर से शिकायत की थी। विधायक ने कहा था कि मुकदमा वापस कराया जाएगा, लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। लेकिन उसके बाद पुलिस ने रविवार को ही राकेश गुप्ता की तहरीर पर दूसरा मुकदमा भी अज्ञात में दर्ज कर लिया।
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भाजपाई बोले पुलिस है जिम्मेदार
स्थानीय भाजपा पार्षद राजेश रुहेला ने कहा कि शनिवार को जो पोस्टर लगे, उन्हें हटवाया गया। उसके बाद यहां पुलिस की पिकेट लग गई। अब सवाल यह है जब पुलिस तैनात थी तो राकेश गुप्ता के मकान बिकाऊ का पोस्टर कैसे लग गया। यह तो सीधे पुलिस की लापरवाही है। भाजपा नेता विनीत शारदा का कहना है कि वह पीड़ित लोगों से मिल चुके हैं। सपा सरकार की तरह अब यहां पुलिस की दबंगई नहीं चलेगी। यदि पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिश की या परेशान किया तो पुलिस अफसर इसके जिम्मेदार होंगे।
समस्या का समाधान चाहिए..
स्थानीय पीड़ित लोगों का कहना है कि यहां कालोनी में गेट है। लेकिन वह बंद नहीं किया जाता। एक वर्ग के कुछ लोग यहां छेड़छाड़, मारपीट और लूट करते हैं। अश्लील गाने बजाते हैं। पुलिस ने अपराध रोकने के लिए यहां कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि हम यहां 25 साल से रह रहे हैं। हम लोगों को स्थायी समाधान चाहिए।
जनता का नहीं होगा उत्पीड़न
इस प्रकरण में भाजपा विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि मामला सिर्फ एक दुकानदार द्वारा संपत्ति बेचने का है। इसमें वहां के रहने वालों को स्थानीय पार्षद या भाजपा मंडल अध्यक्ष से वार्ता करनी चाहिए थी। मेरे पास सभी लोग आए थे। इस मामले का निस्तारण कराया जायेगा। पलायन जैसी कोई बात नहीं है, वैसे भी प्रदेश में योगी की सरकार है, जिसमें इस तरह की कोई गुंजाइश नहीं है। पुलिस अफसराें ने मुकदमा दर्ज कर जो दबाव बनाने का प्रयास किया है, उसमें भी उनसे बात कर मुकदमे वापस कराए जाएंगे। किसी का उत्पीड़न नहीं होगा।
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पुलिस अधिकारियों के लिए यहां कानून व्यवस्था के साथ व्यापारियों और अन्य लोगों की समस्याएं निपटाना बड़ी चुनौती रही हैं। मार्च 2016 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो पुलिस अफसर यहां व्यापारियों और भाजपाइयों को कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाने लगे। उसके बाद दो अप्रैल 2018 को हुए बवाल का ठीकरा पुलिस अफसरों पर ही फूटा। पहले प्रह्लाद नगर प्रकरण में स्थानीय लोगों ने एक वर्ग के लोगों पर मारपीट, धमकी देने, लूट और सरेआम छेड़छाड़ व गुंडागर्दी के आरोप लगाए तो शासन तक गूंज हुई, जिसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। 30 जून को बिना अनुमति के युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली ने जब फैज ए आम में भीड़ जुटाकर मीटिंग की और जबरन जुलूस निकाला तो भाजपा विधायकों ने सीधे अफसरों पर निशाना साधा। भाजपा विधायक जब कानून व्यवस्था पर बिफरे तो एसएसपी व आईजी का तबादला हुआ।
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शनिवार को शास्त्रीनगर सेक्टर-8 में एक दर्जन लोगों ने मकान बिकाऊ के पोस्टर लगाए, हालांकि यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि किराना व्यापारी राकेश गुप्ता ने एक वर्ग के व्यक्ति को 23 लाख में मकान बेचने का सौदा कर दिया। पुलिस ने पोस्टर हटवाते हुए मामला शांत करा दिया। लेकिन नौचंदी थाने में हरकेश कुमार और पूर्णेंद्र शर्मा व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सेक्टर-8 के लोगों ने रविवार को भाजपा विधायक सोमेंद्र तोमर से शिकायत की थी। विधायक ने कहा था कि मुकदमा वापस कराया जाएगा, लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। लेकिन उसके बाद पुलिस ने रविवार को ही राकेश गुप्ता की तहरीर पर दूसरा मुकदमा भी अज्ञात में दर्ज कर लिया।
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भाजपाई बोले पुलिस है जिम्मेदार
स्थानीय भाजपा पार्षद राजेश रुहेला ने कहा कि शनिवार को जो पोस्टर लगे, उन्हें हटवाया गया। उसके बाद यहां पुलिस की पिकेट लग गई। अब सवाल यह है जब पुलिस तैनात थी तो राकेश गुप्ता के मकान बिकाऊ का पोस्टर कैसे लग गया। यह तो सीधे पुलिस की लापरवाही है। भाजपा नेता विनीत शारदा का कहना है कि वह पीड़ित लोगों से मिल चुके हैं। सपा सरकार की तरह अब यहां पुलिस की दबंगई नहीं चलेगी। यदि पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिश की या परेशान किया तो पुलिस अफसर इसके जिम्मेदार होंगे।
समस्या का समाधान चाहिए..
स्थानीय पीड़ित लोगों का कहना है कि यहां कालोनी में गेट है। लेकिन वह बंद नहीं किया जाता। एक वर्ग के कुछ लोग यहां छेड़छाड़, मारपीट और लूट करते हैं। अश्लील गाने बजाते हैं। पुलिस ने अपराध रोकने के लिए यहां कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि हम यहां 25 साल से रह रहे हैं। हम लोगों को स्थायी समाधान चाहिए।
जनता का नहीं होगा उत्पीड़न
इस प्रकरण में भाजपा विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि मामला सिर्फ एक दुकानदार द्वारा संपत्ति बेचने का है। इसमें वहां के रहने वालों को स्थानीय पार्षद या भाजपा मंडल अध्यक्ष से वार्ता करनी चाहिए थी। मेरे पास सभी लोग आए थे। इस मामले का निस्तारण कराया जायेगा। पलायन जैसी कोई बात नहीं है, वैसे भी प्रदेश में योगी की सरकार है, जिसमें इस तरह की कोई गुंजाइश नहीं है। पुलिस अफसराें ने मुकदमा दर्ज कर जो दबाव बनाने का प्रयास किया है, उसमें भी उनसे बात कर मुकदमे वापस कराए जाएंगे। किसी का उत्पीड़न नहीं होगा।