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बांग्लादेशियों के मददगारों की तलाश, सामने आई कई बड़ी बात, जल्द खुलेगा खौफनाक राज

Fri, 20 Nov 2020 12:16 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 20 Nov 2020 12:16 PM IST
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Police officers have started searching for helpers of Bangladeshi citizens in Saharanpur
बांग्लादेशी नागरिक - फोटो : amar ujala

सहारनपुर शहर में कई साल तक रहते रहे बांग्लादेशी नागरिक भाइयों मो. इकबाल और मो. फारुख के मददगारों की तलाश शुरू कर दी गई है। एटीएस के अलावा स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग, नगर निगम, राजस्व से लेकर श्रम विभाग की टीमों को भी मदद के लिए जांच में लगा दिया गया है। ये टीमें गोपनीय स्तर पर फर्जी दस्तावेजों को मुहैया कराने वाले और अवैध प्रवास में सहयोगी बनने वाले लोगों की भूमिका की जांच करेगी। 

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अब तक की छानबीन में यह तो सामने आ गया है कि दोनों बांग्लादेशी नागरिकों का परिवार अब कमेला कॉलोनी की जगह जनता रोड स्थित गांव सिंभालकी जुनारदार में रह रहा है। जांच टीमें अब यह पता लगाएंगी कि कमेला कॉलोनी के पते के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन-किन लोगों की कितनी भूमिका रही है। 
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लेखपाल, पार्षद, पुलिस, एलआईयू तक जांच घेरे में  
एटीएस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण की छानबीन में लेखपाल, पार्षद, पुलिस, एलआईयू, फैक्टरी संचालक सहित क्षेत्र के अन्य लोगों की भी जांच की जानी है। इनके सहित ऐसे अन्य सहयोगियों और दलालों की मदद से ही बांग्लादेशी नागरिकों के आधार पहचान के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ ही बाद में बैंकों में खाते तक खोले जा सके। हालांकि मौजूदा पार्षद से लेकर अन्य लोग अभी तक अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते आ रहे हैं। 
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एसपी सिटी, सहारनपुर विनीत भटनागर ने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी एटीएस ने की और एटीएस टीम ही इसकी अपने स्तर पर विवेचना कर रही है। स्थानीय स्तर पर जो मदद मांगी जा रही है। उसके अनुरूप पड़ताल करवाई जा रही है। उपलब्ध तथ्यों और जांच के आधार पर ही आगे का खुलासा होगा।

- सहारनपुर में उन्हें किसने नौकरी दिलाई और पासपोर्ट, डीएल, वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाने में कौन-कौन उनकी मदद करता रहा।
- यहां किराए का मकान हासिल करने से लेकर अन्य गतिविधियों में उन्हे किसकी मदद मिली। 
- एटीएस आरोपी भाइयों से उनके विदेशी संपर्कों को लेकर भी सवाल करेगी। उनसे नकली करेंसी को लेकर भी सवाल किए जाने हैं। यूपी में छिपे होने के पीछे उनकी क्या मंशा थी और उनके संपर्क में और कितने घुसपैठिए यहां रह रहे हैं इसकी भी जानकारी ली जाएगी।

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खातों से लाखों का लेनदेन
पांच साल, पांच बैंक खाते, सात देश और लाखों रुपये की विदेशी फंडिंग के तार तलाशने के लिए एटीएस और अन्य जांच टीमें लखनऊ से सहारनपुर तक अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही हैं। वर्ष 2015 से लेकर अब तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे बांग्लादेशी मो. इकबाल और फारुख विदेश के किन-किन लोगों के संपर्क में रहे, इसकी छानबीन की जा रही है। जांच के मुख्य बिंदु दोनों भाइयों के पांच बैंक खाते भी हैं। 500 रुपये महीने के कमरे में किराए पर रहने वालों के खातों से तीन साल के अंदर ही लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन की बात कही जा रही है। वहीं बांग्लादेशी नागरिकों के अस्थायी निवास और उससे जुड़े जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल में जुटीं टीमें कमेला कॉलोनी में दर्शाए गए मकान नंबर के झोल में उलझ गई हैं। गुरुवार को भी पते की तस्दीक की गई।

किराएदारों का कराया जाएगा सत्यापन 
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर एस चनप्पा का कहना है कि किराएदारों का सत्यापन कराने के लिए पहले से निर्देश दिए हुए हैं। पुन: सभी थानाध्यक्षों को इस कार्य को गंभीरता से करने को कहा गया है। 

एटीएस को मिली बांग्लादेशी भाइयों की रिमांड
अनधिकृत तरीके से देश की सीमा में प्रवेश करने के बाद दूसरी बार गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी भाइयों से एटीएस पांच दिन तक पूछताछ करेगी। एटीएस की प्रार्थना पर सक्षम अदालत ने दोनों भाईयों की पांच दिन की रिमांड स्वीकृत कर दी है। एटीएस इन दोनों को शुक्रवार की सुबह अपनी अभिरक्षा में लेगी। एटीएस इनसे उनके मददगारों के बारे में जानकारी हासिल करना चाहती है। सूत्र बताते हैं कि एटीएस यह भी जानना चाहती है कि बांग्लादेशी से भारत की सीमा में दो बार घुसने में उनकी किसने मदद की।

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