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Meerut News: वक्फ विधेयक का विरोध कर रहे लोगों पर रहा पुलिस का पहरा

Fri, 04 Apr 2025 01:37 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 01:37 AM IST
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Police kept a watch on people protesting against the Wakf Bill
सरधना। वक्फ विधेयक को लेकर नगर में गणमान्य लोगों पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। जमीयत उलमा हिंद के जिला सदर मौलाना अब्बास ने पूर्व चेयरमैन निजाम अंसारी के आवास पर उनसे मुलाकात की और कहा कि वक्फ की संपत्तियां मुसलमानों द्वारा मुस्लिम समाज और इंसानियत के भले और गरीब तबके के उत्थान में इस्तेमाल के लिए दान की गईं हैं।
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मौलाना अब्बास ने कहा कि वक्फ की संपत्ति पर सरकार का कोई अधिकार नहीं है, बल्कि मुस्लिम समाज की अपनी मिल्कियत है। उसे बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करने और गलत इस्तेमाल से बचाने के लिए केंद्रीय वक्फ काउंसिल, राज्य वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल हैं। यह तीनों संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत ही गठित हैं। वक्फ एक्ट, 1995 के तहत ही भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है। जमीयत उक्त कानून में संशोधन के लिए जल्द ही कड़ा कदम उठाएगी।
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वहीं, शाहवेज अंसारी ने कहा कि वक्फ की जमीनों को खत्म करने के लिए एनडीए सरकार द्वारा जान बूझकर पहले एक झूठा प्रोपेगेंडा चलाया गया कि वक्फ बोर्ड के पास रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सब से ज्यादा जमीन है। बाद में इसके बेहतर प्रबंधन के नाम पर वक्फ संशोधन विधेयक लाया गया है। वक्फ बोर्ड की ही तरह हर धर्म हिंदु, सिख, ईसाई का अपना अलग देवस्थान बोर्ड है जो मंदिरों और मठों और उनकी भूमि को नियंत्रित करते हैं।
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उदाहरण के तौर पर तिरूमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) भारत में एक स्वतंत्र सरकारी ट्रस्ट है, जिसका प्रबंधन आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि केंद्रीय वक्फ काउंसिल की तरह यह एक संपूर्ण भारत के लिए नहीं होकर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग बोर्ड बने हुए हैं, जिनका केंद्रीकरण नहीं किया गया है और न ही केंद्रीयकृत लेखा जोखा है। साथ ही देश में मुसलमानों के लिए इससे ज्यादा बुरा कानून पहले पारित नहीं हुआ। संविधान को ताक पर रखकर ये विधेयक पारित किया गया है। देश में इस विधेयक को लेकर बहुत गंभीर सवाल खड़े होंगे। स्थिति पर नजर रखने के लिए नगर में पुलिस की पैनी नजर बनी रही।
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