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़अवैध निर्माण पर पुलिस नहीं कर रही विभागों का सहयोग
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मेरठ। आवास एवं विकास परिषद् तथा एमडीए के आवासीय क्षेत्रों में पहले ही अवैध निर्माण की बाढ़ है। वहीं, दूसरी ओर बाकी कसर पुलिस पूरी कर रही है। ध्वस्तीकरण तो छोड़िए तहरीर देने के बावजूद उसका संज्ञान नहीं लिया जाता है। हाल ही में तेजगढ़ी पर किए गए निर्माण में आवास एवं विकास परिषद् ने बीती 11 सितंबर को मेडिकल पुलिस को नक्शे से अधिक निर्माण करने पर तहरीर दी परंतु पुलिस की कार्रवाई शून्य रही। यही कारण है कि अवैध निर्माणकर्ता को भी डर नहीं है।
जिले में ऐेसे ही मामले मेरठ विकास प्राधिकरण क्षेत्र में भी हैं। यहां अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए पोर्टल पर विकल्प दिए हैं। इस विकल्प में एफआईआर समेत ध्वस्तीकरण के आंकड़ों को अपलोड करना है। सिर्फ नोटिस और थानाध्यक्ष को पत्र देने के बाद कार्रवाई शून्य हो जाती है। यहां तक कि सील तोड़कर मिलीभगत से कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाता है। इस मामले में पुलिस भी अब कहीं न कहीं सवालों के घेरे में है।
ध्वस्तीकरण के लिए नहीं मिलती फोर्स
यदि अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण करना है तो सबसे बड़ी समस्या पुलिस फोर्स मिलने की है। एक-एक महीने तक तो इसके लिए इंतजार करना होता है। इस मामले में भी पुलिस और अन्य विभागों में समन्वय की बेहद कमी है।
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जिले में ऐेसे ही मामले मेरठ विकास प्राधिकरण क्षेत्र में भी हैं। यहां अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए पोर्टल पर विकल्प दिए हैं। इस विकल्प में एफआईआर समेत ध्वस्तीकरण के आंकड़ों को अपलोड करना है। सिर्फ नोटिस और थानाध्यक्ष को पत्र देने के बाद कार्रवाई शून्य हो जाती है। यहां तक कि सील तोड़कर मिलीभगत से कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाता है। इस मामले में पुलिस भी अब कहीं न कहीं सवालों के घेरे में है।
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ध्वस्तीकरण के लिए नहीं मिलती फोर्स
यदि अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण करना है तो सबसे बड़ी समस्या पुलिस फोर्स मिलने की है। एक-एक महीने तक तो इसके लिए इंतजार करना होता है। इस मामले में भी पुलिस और अन्य विभागों में समन्वय की बेहद कमी है।
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