{"_id":"5f4ab8008ebc3e3cf10aa3dd","slug":"police-heard-the-demand-raised-during-the-riots-in-1987-after-33-years-hashimpura-police-post-was-made-on-the-road-itself-meerut-news-mrt4986946191","type":"story","status":"publish","title_hn":"1987 में दंगे के दौरान उठी मांग को 33 साल बाद पुलिस ने सुना, सड़क पर ही बना दी हाशिमपुरा पुलिस चौकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1987 में दंगे के दौरान उठी मांग को 33 साल बाद पुलिस ने सुना, सड़क पर ही बना दी हाशिमपुरा पुलिस चौकी
विज्ञापन
1987 में दंगे के दौरान उठी मांग को 33 साल बाद पुलिस ने सुना, सड़क पर ही बना दी हाशिमपुरा पुलिस चौकी
मेरठ। सड़कों पर पुलिस चौकियां बनाने को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी, इसके बावजूद चौकियां बनाई जा रही हैं। हाल में हाशिमपुरा पुलिस चौकी सड़क पर बना दी है। आरटीआई में पुलिस ने जवाब दिया कि 1987 में दंगे के दौरान हाशिमपुरा के लोगों ने पुलिस चौकी की मांग उठाई थी, जिसे पुलिस ने 33 साल बाद पूरा किया है।
सिविल लाइन थाने की हाशिमपुरा पुलिस चौकी का निर्माण हुआ है। पुलिस चौकी में एसी तक लगा है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आरटीआई डालकर मेरठ पुलिस से सड़क पर चौकी बनाने व पुलिस चौकी में खर्च होने वाली धनराशि और भूमि के बारे में जानकारी मांगी है। जिसमें सिविल लाइन पुलिस की ओर से जवाब आया कि हाशिमपुरा में 1987 के दौरान दंगा हुआ था। उसी दौरान लोगों ने पुलिस चौकी बनवाने की मांग की थी। लोगों की मांग को देखते हाशिमपुरा पुलिस चौकी का निर्माण हुआ है। पुलिस चौकी सड़क के बीचों बीच नहीं बनी है, बल्कि तिराहे पर कोने की भूमि में बनाई गई है। चौकी में होने वाले खर्च के अभिलेखों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। पुलिस के इस अटपटे जवाब को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। सवाल उठता है कि हाशिमपुरा दंगे का सुप्रीम कोर्ट से भी निर्णय हो चुका है। आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। मेरठ की पुलिस को 33 साल बाद लोगों की मांग पूरी करना याद आया है।
विज्ञापन
मेरठ। सड़कों पर पुलिस चौकियां बनाने को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी, इसके बावजूद चौकियां बनाई जा रही हैं। हाल में हाशिमपुरा पुलिस चौकी सड़क पर बना दी है। आरटीआई में पुलिस ने जवाब दिया कि 1987 में दंगे के दौरान हाशिमपुरा के लोगों ने पुलिस चौकी की मांग उठाई थी, जिसे पुलिस ने 33 साल बाद पूरा किया है।
सिविल लाइन थाने की हाशिमपुरा पुलिस चौकी का निर्माण हुआ है। पुलिस चौकी में एसी तक लगा है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आरटीआई डालकर मेरठ पुलिस से सड़क पर चौकी बनाने व पुलिस चौकी में खर्च होने वाली धनराशि और भूमि के बारे में जानकारी मांगी है। जिसमें सिविल लाइन पुलिस की ओर से जवाब आया कि हाशिमपुरा में 1987 के दौरान दंगा हुआ था। उसी दौरान लोगों ने पुलिस चौकी बनवाने की मांग की थी। लोगों की मांग को देखते हाशिमपुरा पुलिस चौकी का निर्माण हुआ है। पुलिस चौकी सड़क के बीचों बीच नहीं बनी है, बल्कि तिराहे पर कोने की भूमि में बनाई गई है। चौकी में होने वाले खर्च के अभिलेखों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। पुलिस के इस अटपटे जवाब को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। सवाल उठता है कि हाशिमपुरा दंगे का सुप्रीम कोर्ट से भी निर्णय हो चुका है। आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। मेरठ की पुलिस को 33 साल बाद लोगों की मांग पूरी करना याद आया है।
विज्ञापन