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जहरीली हुई शहर की हवा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:18 AM IST
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धुंध के कारण धीमी गति से निकलते वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब और हरियाणा के खेतों में जलायी जा रही पराली की धुंध ने वेस्ट यूपी की आबोहवा में जहर घोल दिया है। इससे जहां हवा दूषित हो गई है तो धुंध के साथ ही समय से पहले आसमान को कोहरे की चादर ने ढक लिया है। बुधवार सुबह भी दृश्यता काफी कम रही। जिसके चलते हाईवे पर कई वाहन आपस में भिड़ गए।
सांस लेना हुआ मुश्किल
इस धुंध से दिल्ली के बाद मेरठ और आसपास के इलाकों में भी सांस लेना दूभर हो गया है। दो दिन से लगातार दिख रहे स्मॉग का असर जनजीवन पर दिखने लगा है। जिसकी चपेट में खासकर बच्चे और बुजुर्ग आ रहे हैं। सुबह से ही कोहरे और धुंध का असर बनने से हाईवे पर दृश्यता कम होने से वाहनों की रफ्तार धीमी हो रही है।
हवा चले तो बात बने
इस बार अक्तूबर माह में हवा की गति अपेक्षाकृत शांत रही। वहीं, नवंबर के इस सप्ताह में ऐसे ही हालात रहे। जिससे धुंध आसमान में बनी रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जहरीले धुएं से निकले महीन कणों ने वातावरण में फैलकर धुंध का आकार ले लिया है। जो वातावरण को दूषित करने के साथ बीमारी का कारण बन रहा है। तेज हवा चलने से जहां धुंध छंटेगी तो तापमान में भी गिरावट आएगी।
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48-72 घंटे में चलेंगी हवाएं
कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि इस समय जितना कोहरा है, वह यदि दिसंबर या जनवरी में होता तो चिलिंग कंडीशन बन जाती है। बढ़ते स्मॉग और प्रदूषण के असर के बीच बुधवार को दिन का तापमान नवंबर के इस सप्ताह सबसे कम रिकॉर्ड किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 24.4 व न्यूनतम तापमान 14.8 डिग्री रहा। दिन में ठंड का ज्यादा अहसास नहीं हो रहा है। 48 से 72 घंटे के बीच में मैैदानी क्षेत्रों में उत्तर-पश्चिम तेज हवाएं चलने की संभावना हैं। जिससे कोहरे और धुंध में कमी आएगी।
क्यों जलाते है पराली
पराली धान की फसल कटने के बाद बचा बाकी हिस्सा होता है, जिसकी जड़ें धरती में होती हैं। किसान फसल पकने पर उसका ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही उसके काम का होता है। बाकी अवशेष किसान के लिए बेकार होते हैं। किसान अगली फसल बोने के लिए खेत खाली करने के चलते सूखी पराली में आग लगा देते हैं। दरअसल किसान अपना समय बचाने के लिए आजकल मशीनों से धान की कटाई कराते हैं। मशीनें धान का सिर्फ ऊपरी हिस्सा काटती हैं, जबकि नीचे का हिस्सा पहले से ज्यादा बचता है। पंजाब और हरियाणा में हर साल पराली जलने से स्मॉग की समस्या पैदा होती है।
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सांस लेना हुआ मुश्किल
इस धुंध से दिल्ली के बाद मेरठ और आसपास के इलाकों में भी सांस लेना दूभर हो गया है। दो दिन से लगातार दिख रहे स्मॉग का असर जनजीवन पर दिखने लगा है। जिसकी चपेट में खासकर बच्चे और बुजुर्ग आ रहे हैं। सुबह से ही कोहरे और धुंध का असर बनने से हाईवे पर दृश्यता कम होने से वाहनों की रफ्तार धीमी हो रही है।
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हवा चले तो बात बने
इस बार अक्तूबर माह में हवा की गति अपेक्षाकृत शांत रही। वहीं, नवंबर के इस सप्ताह में ऐसे ही हालात रहे। जिससे धुंध आसमान में बनी रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जहरीले धुएं से निकले महीन कणों ने वातावरण में फैलकर धुंध का आकार ले लिया है। जो वातावरण को दूषित करने के साथ बीमारी का कारण बन रहा है। तेज हवा चलने से जहां धुंध छंटेगी तो तापमान में भी गिरावट आएगी।
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48-72 घंटे में चलेंगी हवाएं
कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि इस समय जितना कोहरा है, वह यदि दिसंबर या जनवरी में होता तो चिलिंग कंडीशन बन जाती है। बढ़ते स्मॉग और प्रदूषण के असर के बीच बुधवार को दिन का तापमान नवंबर के इस सप्ताह सबसे कम रिकॉर्ड किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 24.4 व न्यूनतम तापमान 14.8 डिग्री रहा। दिन में ठंड का ज्यादा अहसास नहीं हो रहा है। 48 से 72 घंटे के बीच में मैैदानी क्षेत्रों में उत्तर-पश्चिम तेज हवाएं चलने की संभावना हैं। जिससे कोहरे और धुंध में कमी आएगी।
क्यों जलाते है पराली
पराली धान की फसल कटने के बाद बचा बाकी हिस्सा होता है, जिसकी जड़ें धरती में होती हैं। किसान फसल पकने पर उसका ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही उसके काम का होता है। बाकी अवशेष किसान के लिए बेकार होते हैं। किसान अगली फसल बोने के लिए खेत खाली करने के चलते सूखी पराली में आग लगा देते हैं। दरअसल किसान अपना समय बचाने के लिए आजकल मशीनों से धान की कटाई कराते हैं। मशीनें धान का सिर्फ ऊपरी हिस्सा काटती हैं, जबकि नीचे का हिस्सा पहले से ज्यादा बचता है। पंजाब और हरियाणा में हर साल पराली जलने से स्मॉग की समस्या पैदा होती है।