पीएम मोदी की शौचालय निर्माण योजना को 5 हजार परिवारों ने लगाया चूना, 2 करोड़ लेकर गायब
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मेरठ शहर को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित करने की दौड़ में नगर निगम ने सरकारी खजाने को साढे़ चार करोड़ का चूना लगा दिया। अब निगम इन रुपयों की वापसी के लिए हाथ-पांव मार रहा है। ओडीएफ घोषित करने की जल्दबाजी में निगम ने न कोई प्रक्रिया पूरी करायी और ना ही कोई सत्यापन कराया। नतीजा ये हुआ कि अब इन लोगों को ढूंढने में नगर निगम के पसीने छूट रहे हैं।
तकरीबन 11 हजार लोग शौचालय निर्माण की पहली किस्त ले गये। इनमें से केवल कुछ स्थानों पर ही गड्ढे खुद पाये हैं।पांच हजार परिवार तो पैसे लेकर लापता हो गये। आश्चर्य वाली बात ये भी है कि प्रशासन ने इन्हीं 11 हजार परिवार के बलबूते 90 फीसदी सफलता का दावा भी कर डाला। पैसे लेकर लापता हो गये परिवारों को ढूंढने के लिए नगर निगम ने नगर स्वास्थ्य विभाग ही नहीं बल्कि निर्माण विभाग के अधिकारियों की फौज लगायी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही है। अब सरकारी रुपया वापस कैसे मिले। इसका रास्ता तलाशा जा रहा है।
20 हजार शौचालय बनवाने का लक्ष्य
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों के लिए नगर निगम प्रशासन ने महानगर केऐसे परिवारों का सर्वे कराया था जिनकेघरों में शौचालय नहीं थे। सर्वे में महानगर के लगभग 20 हजार परिवारों के पास शौचालय नहीं मिला। इसीआधार पर नगर निगम ने शौचालय निर्माण के लिए आवेदन मांगे थे। जिसके लिए लगभग 35 हजार लोगों ने आवेदन किए थे। जिनमें से 20 हजार आवेदन छांटे गए।
एक शौचालय पर सरकार के 20 हजार खर्च
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत परिवारों को अपने घर में शौचालय निर्माण करने के लिए सरकारी खजाने से किश्तों में 20 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। नगर निगम प्रशासन ने तीन माह पहले लगभग 11 हजार आवेदकों के खाते में शौचालय निर्माण के लिए गड्ढा खोदने के लिए पहली किश्त के चार हजार रुपये जारी कर दिए।
नियमानुसार ये थी प्रक्रिया
- जिनके घर में शौचालय नहीं है। उन्हें पहले नगर निगम में शौचालय के लिए आवेदन करना था।
- सफाई निरीक्षक की सत्यापन रिपोर्ट के बाद ही भवन स्वामी को शौचालय निर्माण के लिए गड्ढा खोदने की अनुमति दी जानी थी।
- आवेदक को खोदे गए गड्ढे की फोटो डालनी थी। इसके बाद ही पहली किस्त चार हजार रुपये आवेदक के खाते में भेजने थे।
- शौचालय का पूरा निर्माण करने के बाद आवेदक के खाते में दूसरी किश्त की धनराशि जानी थी।
चार हजार लिए, नहीं बनाए शौचालय
शहर में लगभग पांच हजार परिवार ऐसे हैं। जिन्होंने सरकारी खजाने से चार हजार रुपये लेने के बाद न तो शौचालय बनवाए और न ही सरकारी धन वापस किया। इतना ही नहीं आवेदन में दिए गए पते पर भी परिवार नहीं मिल रहे हैं। सर्वे में ऐसे भी सैकड़ों परिवार मिलें, जिन्होंने पैसा भी ले लिया, लेकिन शौचालय बनाने से मना कर रहे हैं। कई परिवारों ने तो गड्ढा खुदवाना शुरू भी नहीं कराया तो कई के पास पहले से शौचालय मिले।
सरकारी धन की होगी रिकवरी
जिन परिवारों ने धन लेने के बाद भी शौचालय नहीं बनाए हैं। या फिर पते से गायब मिल रहे हैं। उन सभी की सूची तैयार की जा रही है। फिर से एक बार सफाई इंस्पेक्टरों से सर्वे कराया जाएगा। ताकि धन वापसी की कार्रवाई हो सके।
डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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