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Meerut News: पूर्वजों की याद में लगाएं पौधे, पितरो की शांति के लिए करें तर्पण
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श्रावण हरियाली अमावस्या आज, शिव आराधना के साथ पौधरोपण का विशेष महत्व
नीम, पीपल, बरगद, आंवला और बेलपत्र के वृक्ष की पूजा करें
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या बुधवार को है। हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है। इस दौरान आने वाली हरियाली अमावस्या को शिव आराधना, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और प्रकृति पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर वृक्षों और पौधों की पूजा और पौधरोपण करने की परंपरा है। अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाना भी शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान करने की मान्यता है। इससे परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और वंशवृद्धि की कामना की जाती है।
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए नीम के पेड़ की पूजा शुभ मानी जाती है। पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। इसकी पूजा से शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति की मान्यता है। बरगद की पूजा अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के लिए, जबकि आंवले के पेड़ की पूजा धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए शुभ मानी जाती है। सावन में बेलपत्र के पेड़ की पूजा को भी पापों के नाश के लिए फलदायी बताया गया है।
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हरियाली अमावस्या को प्रकृति पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया जाता है। पितरों के निमित्त अन्न और दूध का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है।
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नीम, पीपल, बरगद, आंवला और बेलपत्र के वृक्ष की पूजा करें
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या बुधवार को है। हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है। इस दौरान आने वाली हरियाली अमावस्या को शिव आराधना, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और प्रकृति पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर वृक्षों और पौधों की पूजा और पौधरोपण करने की परंपरा है। अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाना भी शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान करने की मान्यता है। इससे परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और वंशवृद्धि की कामना की जाती है।
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आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए नीम के पेड़ की पूजा शुभ मानी जाती है। पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। इसकी पूजा से शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति की मान्यता है। बरगद की पूजा अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के लिए, जबकि आंवले के पेड़ की पूजा धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए शुभ मानी जाती है। सावन में बेलपत्र के पेड़ की पूजा को भी पापों के नाश के लिए फलदायी बताया गया है।
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हरियाली अमावस्या को प्रकृति पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया जाता है। पितरों के निमित्त अन्न और दूध का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है।