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नयी पहल : मेरठ में पिक एंड गो में तब्दील होगा भैसाली बस अड्डा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2016 11:35 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में जाम का पर्याय बने भैसाली बस अड्डे को भले ही अब तक शिफ्ट न किया जा सका हो, लेकिन रोडवेज ने जर्जर बिल्डिंग गिरानी शुरू कर दी है। रोडवेज सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में बस अड्डा शिफ्ट होने के बाद यहां से बसों को ‘पिक एंड गो’ योजना के तहत संचालित किया जाएगा। वर्तमान में लखनऊ का आलमबाग बस अड्डा इसी तर्ज पर संचालित हो रहा है। योजना के तहत बसे अड्डे पर रुकती नहीं बल्कि यहां खड़े यात्रियों को पिक कर आगे चली जाती हैं। इससे जाम की स्थिति काफी हद तक कम हो जाती है।
भैसाली बस अड्डे से मेरठ डिपो और भैसाली डिपो की करीब 500 बसें संचालित होती हैं। दोनों डिपो और इनकी वर्कशाप एक जगह होने के चलते पूरे दिन सड़क पर जाम लगा रहता है। लंबे समय से जिला प्रशासन बस अड्डे को शहर से बाहर करने की कवायद में जुटा है। एमडीए ने बस अड्डे को मेरठ-दिल्ली बाईपास स्थित प्रस्तावित न्यू ट्रांसपोर्ट नगर में शामिल किया है। लेकिन जमीन नहीं मिलने पर इसका निर्माण नहीं हो सका है। शहर में प्रस्तावित मेट्रो ट्रेन का स्टेशन भी भैसाली बस अड्डे पर चिह्नित किया गया है। इसके चलते भी यह बस अड्डा आज नहीं तो भविष्य में शहर से बाहर जाना है।
जर्जर बिल्डिंग गिरनी शुरू
रोडवेज ने अड्डे पर बना यात्री शेड गिरा दिया है और जर्जर एआरएम बिल्डिंग को भी गिराया जा रहा है। विभाग ने नए सिरे से बिल्डिंग बनाने के लिए शासन को फाइल तो भेजी थी, लेकिन पैरवी नहीं होने के कारण इस संबंध में कुछ नहीं हुआ। फिलहाल विभाग ने बिल्डिंग गिराने का टेंडर करके इसे गिराना शुरू कर दिया है।
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बसे रुकेंगी नहीं, यात्री लेकर चली जाएंगी
क्षेत्रीय रोडवेज अधिकारी बस अड्डे के भविष्य को लेकर बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन तैयारी पिक एंड गो योजना के तहत संचालित होने वाले बस अड्डे की तरह हो रही है। अधिकारियों का कहना है नई बिल्डिंग बनाया जाना तय नहीं हुआ है। फिलहाल जर्जर बिल्डिंग गिराई जा रही है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही आगे का प्लान बनाया जाएगा। लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह कवायद बस अड्डे को बाहर जाने की स्थिति में ही हो रही है। बस अड्डा और वर्कशाप के अलावा एआरएम व आरएम ऑफिस की बिल्डिंग बाहर शिफ्ट होने के बाद अड्डे की जमीन खाली रखी जाएगी और बसों को पिक एंड गो योजना के तहत संचालित किया जाएगा। बसे यहां आएगी और यात्रियों को पिक करके चलती रहेगी। यहां पर रुकेगी नहीं।
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भैसाली बस अड्डे से मेरठ डिपो और भैसाली डिपो की करीब 500 बसें संचालित होती हैं। दोनों डिपो और इनकी वर्कशाप एक जगह होने के चलते पूरे दिन सड़क पर जाम लगा रहता है। लंबे समय से जिला प्रशासन बस अड्डे को शहर से बाहर करने की कवायद में जुटा है। एमडीए ने बस अड्डे को मेरठ-दिल्ली बाईपास स्थित प्रस्तावित न्यू ट्रांसपोर्ट नगर में शामिल किया है। लेकिन जमीन नहीं मिलने पर इसका निर्माण नहीं हो सका है। शहर में प्रस्तावित मेट्रो ट्रेन का स्टेशन भी भैसाली बस अड्डे पर चिह्नित किया गया है। इसके चलते भी यह बस अड्डा आज नहीं तो भविष्य में शहर से बाहर जाना है।
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जर्जर बिल्डिंग गिरनी शुरू
रोडवेज ने अड्डे पर बना यात्री शेड गिरा दिया है और जर्जर एआरएम बिल्डिंग को भी गिराया जा रहा है। विभाग ने नए सिरे से बिल्डिंग बनाने के लिए शासन को फाइल तो भेजी थी, लेकिन पैरवी नहीं होने के कारण इस संबंध में कुछ नहीं हुआ। फिलहाल विभाग ने बिल्डिंग गिराने का टेंडर करके इसे गिराना शुरू कर दिया है।
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बसे रुकेंगी नहीं, यात्री लेकर चली जाएंगी
क्षेत्रीय रोडवेज अधिकारी बस अड्डे के भविष्य को लेकर बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन तैयारी पिक एंड गो योजना के तहत संचालित होने वाले बस अड्डे की तरह हो रही है। अधिकारियों का कहना है नई बिल्डिंग बनाया जाना तय नहीं हुआ है। फिलहाल जर्जर बिल्डिंग गिराई जा रही है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही आगे का प्लान बनाया जाएगा। लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह कवायद बस अड्डे को बाहर जाने की स्थिति में ही हो रही है। बस अड्डा और वर्कशाप के अलावा एआरएम व आरएम ऑफिस की बिल्डिंग बाहर शिफ्ट होने के बाद अड्डे की जमीन खाली रखी जाएगी और बसों को पिक एंड गो योजना के तहत संचालित किया जाएगा। बसे यहां आएगी और यात्रियों को पिक करके चलती रहेगी। यहां पर रुकेगी नहीं।